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12 Aug

मौत ..........जाते जाते

Published by Sharhade Intazar Ved

मौत ..........जाते जाते

जख्मी हो जाते हैं दफनाते वक़्त हाथ जिनके,
अँधेरे आसुओं में बह जाते हैं दिन रात उनके,

यादें तो परछाई हो ही जाया करती हैं,

लगा के जो रखते हैं दिल से जज्बात उनके,

फिर वक़्त के साथ बदल जाती है परछाइयाँ,
नए हो जाते हैं जज्बात और नए हालात उनके

मौत का निशाँ गहरे तभी उनमें छूटता है
जब रूह का रिश्ता हो जाए रूहानियत के साथ उनके

Comment on this post

om prkash 08/13/2015 16:28

Sir aap se ek request hai ki aap is trhe ki pics na daale baaki likha to bahut sunder h

om prkash 08/13/2015 04:10

Bahut khoob sir

ved 08/13/2015 05:01

Shukriya Brother Om