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Top posts

  • रिश्तों की महक

    02 August 2015

    चलो रिश्तों में नयापन अंजाम देते हैं, कुछ गीले तुम करो कुछ खता हम मान लेते हैं चलो रिश्तों में नयापन अंजाम देते हैं, कुछ गीले तुम करो कुछ खता हम मान लेते हैं आज तेरे मुस्कराने पर चल हम क़त्ल हो जाएँ, कल तेरी हसी को हम दिल्लगी मान लेते हैं, तूने पूछा गर...

  • स्याही के अंदाज़,

    03 August 2015

    जाने कितने लफ़्ज़ों के मानो को अंजाम दे डाले, बिन लिफाफों के ही दिलों के पैगाम दे डाले, जाने कितने लफ़्ज़ों के मानो को अंजाम दे डाले, बिन लिफाफों के ही दिलों के पैगाम दे डाले, स्याही की दरकार होती है जज्बात लिखने को आपकी स्याही से जाने कितनो ने नाम बदल डाले...

  • खुदा तेरे अंदाज़ अलग

    04 August 2015

    एक तो खुदा तेरी ये दुनिया उस पर मरे ज़मीर वाले ये लोग चंद सिक्कों के लिए औकात बताते ये लोग माना के मंदिर ना मस्जिद जाता मैं तूने तो देखा दिल से सज़दे निभाता हूँ मैं तेरा भी साथ नहीं या है क्या समझूँ मैं, देख कर तो लगता तू भी साथ निभाता इन ज़मीर वालों का...

  • मोहब्बत खेल नसीबों का

    06 August 2015

    शोहरतें आपकी खिदमत में बसर हैं , चाहतो का कौन जाने कितना असर है, दूर तो हो पर करीब रहना, मोहब्बत में हमारा नसीब रहना, ये इल्तज़ा हमारी समझ कर, हर दम खुदा सा तुम करीब रहना सफर इश्क का दर्द से शुरू करता हूँ, वो जो लूटते हैं सकूँ उन पर गुरुं करता हूँ, इश्क...

  • मोहब्बत के रंग जुदा जुदा

    06 August 2015

    हुस्न उलझन है ये जानते सब हैं, मुहब्बत में लुटे बिना मानते कब हैं, चाहे जितना पूछ लो हुस्न वालों से, वो अपनी अदाएं सम्हालते कब हैं बिना ेऐतबार के वादे भी किये जाते हैं, कुछ वो निभाते हैं कुछ हम निभाते हैं मोहब्बत के बंधन की दास्ताँ निराली ही मिलेगी, यादें...

  • (झुलसते जज्बात)

    08 August 2015

    तितलियों के पंख झुलश गए होंगे, जब सूरज ने तीखे अल्फ़ाज़ कहे होंगे, हवाएँ भी थम सी गयी होंगी , बादल जब तक ना बरस गए होंगें, मैं तो बेबस था पीना ही था ज़िन्दगी का जहर , तेरे दिलासे भी क्या बेवजह रहे होंगे, कभी जाना नहीं किसी ने हाल दिल का, हमने भी तो आखिर...

  • जिन्दगी एक नज़र यूँ भी

    08 August 2015

    जीते जीते एक पल को ठहर गया हूँ मैं, ज़िन्दगी तुझे क्यों लगा के ज़ी गया हूँ मैं, अब ढोता हूँ तेरे दिए लम्हों को मैं , दुनियादारी तेरे भरोसे भी कब रहा हूँ मैं माना के हर तरफ शोर है तेरे होने का, तू नहीं है ये सोच कर भी तो जी रहा हूँ मैं, चंद रौनकें, चंद निवाले...

  • जंग दोस्ताने में

    08 August 2015

    बन्दूक की गोली सा रूठ जाते हैं दोस्त, रूठना है कंही , निशाना कंही लगाते हैं दोस्त, यूँ तो जंग का इरादा होता है कभी कभी, पर जुबा की तीरंदाज़ी रोज दिखाते हैं दोस्त, कुछ ेऐसे भी मिल पड़े हैं इस राह में हमसे, शोहरत और दौलत के ढेर पर खड़े हाथ मिलाते हैं दोस्त,...

  • आरजूऐ........ मोहब्बत

    26 September 2015

    आराम से रहता है मोहब्बत नहीं करता, महबूब की दुनिया से शिकायत नहीं करता, एक तू है हर वक़्त ही तलवार लिए है ज़ालिम भी तो ज़ख्मों की हिमायत नहीं करता, दिमागों का यंहा दस्तूरे मोहब्बत भी क्या खूब पाया, करता सियासत हमेशा, कहता सियासत नहीं करता, कभी जब तन्हाई...

  • (रेगिस्तान में बारिश)

    18 September 2015

    रेगिस्तान के बाशिंदों से प्यास का मतलब पूछता था खुदा, जो बादल बरस जाता था वो हो जाता था महफ़िल से जुदा, फिर एक दिन यूँ बरसाया आसमाँ ने पानी, त्राहिमाम कर उठी थी सहरा के बाशिंदों की ज़िंदगानी, हमारी प्यास का गलत शायद अंदाज़ा लगा बैठा था खुदा, प्यास बुझाने...

  • बरसते बादल

    09 August 2015

    बादलों की टोलियां आसमान से ही आती है, बूंदें बरसातों की रह रह के गुनगुनाती हैं, धरा चल थोड़ा तुझको भिगालें हम, हलकी चले पवन तो पत्ते पत्ते को सजा लें हम, बूंदें जो ठहर गयी पेड़ों की शाखों पर, ज़मी के कुछ जर्रों की प्यास बुझा जाती हैं जाने सहरा में कहा बरसातें...

  • इश्क की मुलाकातें

    09 August 2015

    चाहत में यादों की बसर तो हो ही जाती है, नशे में मोहब्बत के खुमारी हो ही जाती है, धड़कता है दिल ेऐसे उनके रूबरू होने पर, हर धड़कन फकत उनको ही गुनगुनाती है, मगर जब वो लौटने की बात करते हैं, दिल डूबने लगता है उदासी छा सी जाती है , फिर वो मुस्करा कर करते हैं...

  • धड़कनें रोज की

    09 August 2015

    तेरी खामोशियों को सुनते हैं,लगा लेते हैं फिर दिल से चाहने वाले ेऐसे मेरे दोस्त मिलते हैं बड़ी मुश्किल से तोड़कर खुद को सम्हल जाना भी पड़ता हैं, महफ़िलों में कभी कभी अकेले मुस्कराना भी पड़ता है खुदा गुनाहों का हिसाब कर तो देता है, मगर सुधरने का मुकम्मल वक़्त...

  • तिरंगा गरीब हाथों में

    10 August 2015

    आज़ाद तिरंगा कब होगा, गरीब ना बच्चा जब होगा भारत का कोई गरीब बच्चा जब तिरंगा बेचता है, भारत की रज रज का साथी आवाम उसको देखता है, जाने कितनों ने वो जब आया कार के शीशे चढ़ाये, फिर भी वो मुस्कराकर उम्मीदों के सलाम ठोकता है, वजह क्या थी दो निवाले, तन ढकने को...

  • आज की धड़कनें,

    10 August 2015

    भोर के उजालों ने पैगाम ईश्वर का दिया, इंसान हमेशा रखे जलता इंसानियत का दिया, सलामों की इस दुनिया में एक सलाम यूँ भी कर डाला, जब भी हुआ उदास मन, आपकी दुआओं का काफिला निकाला, नज़राने देख मैं लाया हूँ तेरे मुस्कराने के , छोड़ ये अकेलापन अब हंस भी दे बहाने...

  • चलो खुदाई का दर सजालें

    11 August 2015

    गुजर जाना हर हद से खुदाई के तरानों में, ज़माने लग जाते हैं दोस्त, खुदा का दर सजाने में, सजा ले कोई भी दैरो - हरम तो क्या होगा, इबादत में लिखे लफ्ज़ गुनगुना ले तो क्या होगा, मज़ा तब है जब लफ्ज़ निकले खुदा की याद आने में, ऐसी सजावट है मिलती खुदा के ही दीवाने...

  • तन्हाइयों की दास्ताँ

    11 August 2015

    पहचानता हूँ शहर को फिर भी क्यूँ अनजान हूँ, रास्तों से गुजर चूका हूँ भूल चुका नादान हूँ , कुछ दूर चलता हूँ कारवां संग, फिर खुद को तन्हा कर के घूमता वीरान हूँ, महफ़िलों में दखल मेरा फिर भी मैं सुनसान हूँ, बहलाता हूँ मैं दिल सभी का, खुद का पर दिल ना बहले...

  • जिंदगी और मेरे अंदाज़

    12 August 2015

    ज़िन्दगी तुझे जीने के अंदाज़ बयां हो गए , तेरी खूबसूरती के देख कंहा कंहा निशाँ हो गए , कभी ठोकरों पे लिया, कभी वीरानो में दिया पांव जख्मी तेरे मेरी मंज़िल के निशाँ हो गए, वो भी था वक़्त जब तमन्नाओं की आंधी सी थी, जाने कितने लम्हे तेरी चाहत में फना हो गए,...

  • मौत ..........जाते जाते

    12 August 2015

    जख्मी हो जाते हैं दफनाते वक़्त हाथ जिनके, अँधेरे आसुओं में बह जाते हैं दिन रात उनके, यादें तो परछाई हो ही जाया करती हैं, लगा के जो रखते हैं दिल से जज्बात उनके, फिर वक़्त के साथ बदल जाती है परछाइयाँ, नए हो जाते हैं जज्बात और नए हालात उनके मौत का निशाँ गहरे...

  • धरा से ………………किसानो की मौत तक

    12 August 2015

    चिंगारियों की शोलों में ज़िन्दगानियां हैं, बुझ के भी तो रह जाती निशानियाँ हैं राख में लिपटी हुई जाने कितनी कहानियां हैं, माटी का सीना चीर कर अनाज का जीवन लिया उस बीज की भी तो अपनी कहानियां हैं, पर उस बीज को बोने वालों की मौतें हो रही, धरती तेरे दामन में...

  • आज़ाद वतन

    14 August 2015

    आज़ाद वतन है हर साँस वतन है, आवाम को तिरंगे का ेअहसास वतन है, शहीदों ने जिसे लहू से सींचा वो खास वतन है, हर एक का अपना अपना योगदान रहा है, कोई विद्या से निभाता, कोई माटी अन्न उगाता, कोई सीना छलनी करता, कोई सर कफ़न हो जाता,, वीरों की भूमि है ये तब ही तो...

  • आज की धड़कने .............

    17 August 2015

    सूर्य की बादलों में अटखेलियां हैं हो रहीं, इंसान के जीवन की फिर एक सुबह है हो रही, भोर की किरणे दुआए दे रही हैं यूँ, धरा भी जैसे हर छन पुलकित पुलकित हो रही, संघर्ष की दिशा का चयन गर सही ना हो पाये, तो फिर इंसान ता उम्र संघर्ष में ही बीती पाये, कभी पता...

  • इश्क के........ अरमान

    18 August 2015

    उम्र मेरे इश्क की कम करता नहीं खुदा, झोलियाँ मुरादों से भी भरता नहीं खुदा, सुना है के शख्सियत बनाने में महारथ है तुझे, तेरे हुनर का रंग मुझमे क्यूँ दीखता नहीं जुदा, इश्क में बातों से दीदार तक की हसरत, होती सबको है तो क्यूँ वो मुलाकात रखता नहीं खुदा, तमन्ना...

  • आज की..... धड़कने (II)

    18 August 2015

    सुबह ने दुआओं के द्वार खोले हैं, सूरज ने पहनाये किरणों के चोले हैं, पवन लहरा रहा है आँचल धरा का, पंछियों ने चहचहाकर यारों के सत्कार बोले हैं, उनका कहना है के सज़ाएं बाँट लो चलो ख़्वाबों में आकर, हक़ीक़त में सज़ाएं बाँट कर ख्वाबों की बात करते हैं , मुस्कराते...

  • वतन के रखवालों के नाम

    20 August 2015

    समंदर की सीमाओं पर डटे सैनिकों को सलाम है, जबां जबाँ पुकारती फकत वतन और तिरंगे का नाम है, लहरों और तूफानों ने जिनको है ये सीखा दिया, हर मुश्किल घडी में भी दुश्मन के इरादे करना नाकाम है, लहू का कतरा कतरा शहीदों का पुकारता बस अब नाम है, आसमा तुझ पर दस्तखत...

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