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12 Aug

धरा से ………………किसानो की मौत तक

Published by Sharhade Intazar Ved

धरा से ………………किसानो की मौत तक

चिंगारियों की शोलों में ज़िन्दगानियां हैं,
बुझ के भी तो रह जाती निशानियाँ हैं
राख में लिपटी हुई जाने कितनी कहानियां हैं,

माटी का सीना चीर कर अनाज का जीवन लिया
उस बीज की भी तो अपनी कहानियां हैं,

पर उस बीज को बोने वालों की मौतें हो रही,
धरती तेरे दामन में ये कैसी निशानियाँ हैं

तभी धरा तू फाड़ लेती है अपना अंतःस्थल,
तेरी बेबसी ही इंसा के विनाश की कहानियां हैं,

मौत की नींद जो सो गए तेरे दामन में जाकर,
उनकी चिताओं की चिंगारियां राख में दबाकर,

विनाश पर है आ रही हर पल जवानियाँ हैं
चिंगारियों की शोलों में ज़िन्दगानियां हैं.

Comment on this post

anil juneja 08/27/2015 18:38

तभी धरा तू फाड़ लेती है अपना अंतःस्थल, तेरी बेबसी ही इंसा के विनाश की कहानियां हैं,
bahut achha bya kiya hai dharaa ke dard or bebasi ko

vikas lamba 08/13/2015 16:46

Ved ji kya khoob bola aap ne
Bahut gehra raj khola aap ne

ved 08/13/2015 18:45

shukriya Vikash BHai

om prkash 08/13/2015 04:07

Jai jwaan jai kisaan jai sharhade mhaan

ved 08/13/2015 05:00

Shukriya Om Bhai

om prkash 08/13/2015 04:02

Jai jwaan jai kisaan jai sharhade intzaar