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21 Sep

(खुदा से कुछ हमने यूँ ......इल्तज़ा की)

Published by Sharhade Intazar Ved

(खुदा से कुछ हमने यूँ ......इल्तज़ा की)

अशआर लिख रहा था एह्साशों से गुजर कर,
अब तो खुदा राजी हो ख्यालों में बसर कर

माना के जज्बातों की कदर करता नहीं ज़माना,
जज्बातों से खुदा मेरे निगाहों में असर कर,

वो दूर तलक सदा मेरी जा कर है लौट आती,
कुछ नज़दीकियां अपनी मेरी राहों में मगर कर,

सोचा है कायनात से तेरी इबादत ही मैं मांगूं,
गर रहमत हो तेरी मेरे गुनाहो में खबर कर,

देखने को देखे हैं मैंने फरेबों के मसीहा,
फरिश्तों की जानिब मेरे जज्बों में नज़र कर

अशआर लिख रहा था एह्साहों से गुजर कर

Comment on this post

Manju 09/24/2015 18:10

Bemisaal

वेद 09/24/2015 22:18

शुक्रिया जी

0m prakash 09/24/2015 10:52

सलाम Sharhade Intazar Ved ji बह्ह्ह्हुत खूब
भगवान से बड़ा मित्र इस दुनिया में है ही नहीं क्योंकि वही तो जीवन के रथ को हांकता है हमारा यार बनकर। सखा बनकर।

वेद 09/24/2015 22:17

सलाम भाई शुक्रिया

monika 09/22/2015 10:44

निशब्द।
इस अंदाज़ की लफ़्ज़ों में तारीफ़ मुमकिन ही नही

वेद 09/24/2015 22:17

शुक्रिया जी