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12 Aug

जिंदगी और मेरे अंदाज़

Published by Sharhade Intazar Ved

जिंदगी और मेरे अंदाज़

ज़िन्दगी तुझे जीने के अंदाज़ बयां हो गए ,
तेरी खूबसूरती के देख कंहा कंहा निशाँ हो गए ,

कभी ठोकरों पे लिया, कभी वीरानो में दिया

पांव जख्मी तेरे मेरी मंज़िल के निशाँ हो गए,

वो भी था वक़्त जब तमन्नाओं की आंधी सी थी,
जाने कितने लम्हे तेरी चाहत में फना हो गए,

आज भी इस दौर में तेरे हाथों में गिरेबां है मेरा,
हम भी क्या करते मौत की दस्तक से जँवा हो गए,

Comment on this post

manisha 08/15/2015 19:04

lasjwaab .likha hai aap ne
तू जिंदगी को जी, उसे समझने की कोशिश न कर
सुन्दर सपनो के ताने बाने बुन,उसमे उलझने की कोशिश न कर
चलते वक़्त के साथ तू भी चल, उसमे सिमटने की कोशिश न कर
अपने हाथो को फैला, खुल कर साँस ले, अंदर ही अंदर घुटने की कोशिश न कर
मन में चल रहे युद्ध को विराम दे, खामख्वाह खुद से लड़ने की कोशिश न कर
कुछ बाते भगवान् पर छोड़ दे, सब कुछ खुद सुलझाने की कोशिश न कर
जो मिल गया उसी में खुश रह, जो सकून छीन ले वो पाने की कोशिश न कर
रास्ते की सुंदरता का लुत्फ़ उठा, मंजिल पर जल्दी पहुचने की कोशिश न कर...

vikas lamba 08/13/2015 16:32

Behtreen