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08 Aug

जंग दोस्ताने में

Published by Sharhade Intazar Ved

जंग दोस्ताने में

बन्दूक की गोली सा रूठ जाते हैं दोस्त,
रूठना है कंही , निशाना कंही लगाते हैं दोस्
त,

यूँ तो जंग का इरादा होता है कभी कभी,
पर जुबा की तीरंदाज़ी रोज दिखाते हैं दोस्
त,

कुछ ेऐसे भी मिल पड़े हैं इस राह में हमसे,
शोहरत और दौलत के ढेर पर खड़े
हाथ मिलाते हैं दो
स्त,

कुछ तो जंग में खुद को बाहुबली समझ कर,
बेवजह ब्लॉक करते जाते हैं दोस्
त,

फिर जब याद आती है मान ही जाते हैं दोस्त

Comment on this post

ajay kumar 08/22/2015 17:16

बहुत खूब लिखा है

ved 08/23/2015 18:38

Thanks Ajay ji

888888 08/16/2015 07:46

मौला मेरे मन के सारे बुरे रंग साफ कर देना।
दुखाया हो गर दिल कभी...किसी का...माफ कर देना॥
Behatrin andaaz e bayan...

ved 08/23/2015 18:39

Thanks 888888888 Ji

manju 08/08/2015 18:35

Jin rishto me ldayi jhada nhi hota iska matlab vo rishte dil se nhi dimaag se nibhaye ja rahe hai ....koyi baat nhi nok jhok se rishto me pyaar bdtaa hai

ved 08/08/2015 19:08

Right saty kahte hain aap