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08 Aug

जिन्दगी एक नज़र यूँ भी

Published by Sharhade Intazar Ved

जिन्दगी एक नज़र यूँ भी

जीते जीते एक पल को ठहर गया हूँ मैं,
ज़िन्दगी तुझे क्यों लगा के ज़ी गया हूँ मैं
,

अब ढोता हूँ तेरे दिए लम्हों को मैं ,
दुनियादारी तेरे भरोसे भी कब रहा हूँ मैं

माना के हर तरफ शोर है तेरे होने का,
तू नहीं है ये सोच कर भी तो जी रहा हूँ मै
ं,

चंद रौनकें, चंद निवाले ये तो जीवन नहीं,
इंसान को इंसान सम्हाले यूँ भी जी रहा हूँ म
ैं

सकूँ के दरिया पर किनारे क्यूँ कम हैं,
तुझे देख कर सकूँ मिले बहते जज्बातों को कह रहा हूँ मै

Comment on this post

ajay kumar 08/23/2015 16:51

अविस्मरणीय गजल..

ekta 08/16/2015 03:10

फर्क होता है खुदा और फकीर मे,
फर्क होता है किस्मत और लकिर मे,
अगर कुछ चाहो और वो न मिले, तो
समझ लेना की कुछ और अच्छा लिखा है तकदीर मे..!!

ekta 08/16/2015 03:10

umda

manju 08/08/2015 12:45

umda

manju 08/08/2015 12:25

Udasiyon Ki Vajah To Bahut Hai Zindagi Mein,
Lekin Bevajah Khush Rehne Ka Maza Hi Kuch Aur Hai!