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08 Aug

सलाम का अंदाज़ जुदा

Published by Sharhade Intazar Ved

सलाम का अंदाज़ जुदा

दुआ से सलाम तक
नमस्ते से प्रणाम तक,
आदाब से राम राम तक,
गुड मॉर्निंग से गुड नाईट तक
बनता है सब कुछ,
मगर आपका हक़ बनता है,
गुलजार
से ख़य्याम तक

सत्श्रीकाल जी

Comment on this post

monika 08/26/2015 16:46

सलाम कहो या नमस्ते कहो
जो भी कहो बस हँसते - हँसते कहो।
दिलों में कोई दूरियां न हों ,
अभिवादन करने की मजबूरियां ना हों।
जब लगे की अभिवादन करना मजबूरी है ,
तो उस से भली तो फिर दूरी है।
फेसबुक ने की इसकी भी तैयारी पूरी है
unfriend यां block कर देना ही तब जरुरी है।

ved 08/26/2015 17:43

behtareen Monikaa ji aapka andaze bayan bilkul sahi farmaya ji aapne thanks ji

ajay kumar 08/23/2015 16:52

बहुत सूंदर

ved 08/26/2015 17:43

thanks ajay bhai

om prkash tiwari 08/16/2015 15:01

सलाम Sharhade Intazar Ved ji .-एक पुराना गाना है आप ने पता नही सुना है या नही ----अगर नही सुना तो आज सुन ना --- क्या खूब दिखती हो ,बड़ी सुन्दर लगती हो ,--- क्या खूब दिखती हो ,बड़ी सुन्दर लगती हो। फिर से कहो ,कहते रहो बड़ा अच्छा लगता है ,प्यार का हर सपना सच्चा लगता है इसी गाने की तर्ज़ पर मैंने भी आप के लिए कुछ लिखा है और गुनगुना रहा हूँ पर मेरी आवाज़ आप तक तो पहुंचे गी नही ,तो मेरी तरफ से आप अपने लिए गए लें यां गुनगुना लें।क्या खूब लिखते हो बड़ा अच्छा लिखते हो , क्या खूब लिखते हो बड़ा सुन्दर लिखते हो। फिर से लिखो ,लिखते रहो ,बड़ा अच्छा लगता है। आप पर माँ सरस्वती की बहुत कृपा है और ये कृपा बनी रहे। जादू है आप की कलम में।

ved 08/26/2015 17:42

Bahut sundar Om bhai aapka andaz jabarjast hai Tahe dil se sukrgujar hun ji aapka

monika 08/09/2015 15:12

bahut khoob

ved 08/09/2015 15:59

Thanks Monika ji