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09 Sep

लेखन की .......दास्ताँ

Published by Sharhade Intazar Ved

लेखन की .......दास्ताँ

उम्र गुजरी हुनर कोई ना हाथ आया,
पेट भरना ना हो सका खुद को सिकस्त पाया,

जाने कौन घडी थी जब ये कलम उठाई,
खुदा ने शायद जज्बात लिखने को था कागज़ बनाया,

कुछ दिए एह्साश जिसको मैं लिख तो पाया,
ज़िन्दगी में सिक्कों की कमी कोई भर ना पाया,
किसी लिखने वाले की दास्ताँ को ऐसा भी पाया

Comment on this post

Monika 09/10/2015 02:22

Likhne waalo ko bhi kya khoob hunar se nwaazta hai khuda .likhna hr kisi ke bs ki baat nhi
Bahut khoob likhte hain aap .laajwaab

ved 09/10/2015 16:55

shukriya monika ji