Overblog Follow this blog
Administration Create my blog

Top posts

  • आज की धड़कने .........(XIII)

    09 September 2015

    सुबह के उजियारे प्रेम का सन्देश ले आये, इंसान के अंधेरों की जितनी हो प्यास बुझ जाए, इंसानियत हर घडी ख़ुशी के गीत गाये, दोस्तों की ज़िंदगानी दोस्ती में बीत जाए, साथ गुजारे वक़्त की कसक रह ही जाती है रिश्तों की, दूर रहते है और हमेशा याद आते हैं ये ज़मी है रिश्तो...

  • आईनों का.............. दर्द

    16 September 2015

    आईनों का दर्द कोई समझेगा क्या, अक्श अपना दिखाई ना दे कोई बदलेगा क्या, सूरतें दिखती तो हैं ख़ूबसूरत मगर, नकाब कितने हैं एक चेहरे पर कोई कहेगा क्या, टूटता है जब कोई तब नकाब भी टूट जाता है, आईने के टुकड़ों में हर टूटा अक्श नज़र आता है, चूर आईनों सी भी होती...

  • आज की धड़कने .....(XIV)

    16 September 2015

    इक पन्ना ज़िन्दगी का जब पढ़ा मैंने, कुछ पन्नो से हटा ली बंदगी मैंने, क्या गज़ब के तूने सितम लिख दिए, हैराँ हूँ के कैसे ख़ुशी के पल कब लिख दिए, इस ज़िन्दगी की किताब जब तलक पूरी होगी, तेरे शुकराने में मेरी तरफ से ना कमी होगी, ज़िन्दगी के हर पन्ने में हलचल तो...

  • आज की धड़कने ......(XV)

    16 September 2015

    माँ भारती के आँचल का परचम हो गया होगा, आपके लफ़्ज़ों का इंकलाब भरकम हो गया होगा इंसान से मोहब्बत है खुदा को हर सुबह का आना इसका सबूत है, सूरज के निकलने से चाँद के ढलने तक बस खुदा का ही वजूद है, दुआओं का सफ़र कुछ आगे यूँ आज करते हैं , दोस्तों की ज़िन्दगी ना...

  • ज़मी पर सरहदें ......ना बनें

    16 September 2015

    सरहदें बनायीं गयी धरा को बाँट बाँट कर, मुल्क खुद परेशां होगा सरहद लहू से पाट कर, ज़िंदगियाँ वक़्त से पहले ही फना होती रहीं, ज़मी भी शायद हैराँ हो इंसा के इस जज्बात पर, यूँ तो मिटटी मिटटी में फर्क होता नहीं कोई, जिसमें तू पैदा हुआ उस मिटटी से भी कभी तू बात...

  • पागलपन की...... सजा

    16 September 2015

    पागलपन का दर्द भी क्या अजीब दर्द है, पागल जिसे समझता नहीं जाने कौन हमदर्द है, कभी कभी कुछ होते हैं जो छूट जाते हैं इससे, मगर जब याद आते हैं लम्हे सिहर उठते बेदर्द हैं, खुदा की सज़ाओं में से ये सज़ा निराली है, दुनिया से रहता है बेखबर एक अजीब ही गर्द है,...

  • खुदा की बदलती........ सियासत

    16 September 2015

    खुदा की सियासत भी गड़बड़ाई हुई है, जँहा पड़ना था सुखा वंहा बाढ़ आई हुई है, खुदा का वजीर शायद सरकारी मुलाजिम हुआ है, तभी मौसमों में हेर फेर हुआ है, एक टुकड़ा बादल का पानी लिए घूमता चला जाता है, रिश्वत नहीं दी शायद तभी बाढ़ पर बरस पाता है, वजीर की जोरू की ख्वाहिशें...

  • (शाकाहार और....... मांसाहार)

    16 September 2015

    किसी के निवालों में खामियां निकाला नहीं करते, जीव के दर्द का एह्साश बताया करते हैं, विज्ञानं की तहें बताती तो ये भी है, जीवाणुं तो शाकाहार में भी रहते हैं, जुदा होकर खुद को ख़िताब दे लेते हो, इंसान को बेरहमी से क़त्ल करते हो, खुद को शाकाहारी भी कहते हो,...

  • आज की धड़कने .....(XVI)

    16 September 2015

    सुबह के उजालों ने याद दिलाया, खुदा फिर आज है हमारे दर पर आया, ख़ुशी हो या गम ये अपना अपना नसीब , जीवन की सौगात दे फिर एक दिन बढ़ाया , दोस्त खुश रहे ये हमने है दिल से गुनगुनाया आँखों की तड़प का जो तुझे अंदाज़ हो जाए, हर हंसी नज़ारे का तू हंसी साज हो जाए, मोहब्बत...

  • ज़माने के बदलते...... अंदाज़

    21 September 2015

    अजीब मंजर है ज़माने का मेरे साहब, कंही है रंजो गम तो कंही खंजर मेरे साहेब, हाथ खाली रख कर भी हैं क़त्ल हो रहे, निगाहों में बसा रखे हैं क़त्ल के सामां मेरे साहेब , खुशिया पल दो पल की मिले ना मिले, दर्द का मिलना तो पुख्ता तय ही है मेरे साहेब, खुदा भी दुनिया...

  • (खुदा से कुछ हमने यूँ ......इल्तज़ा की)

    21 September 2015

    अशआर लिख रहा था एह्साशों से गुजर कर, अब तो खुदा राजी हो ख्यालों में बसर कर माना के जज्बातों की कदर करता नहीं ज़माना, जज्बातों से खुदा मेरे निगाहों में असर कर, वो दूर तलक सदा मेरी जा कर है लौट आती, कुछ नज़दीकियां अपनी मेरी राहों में मगर कर, सोचा है कायनात...

  • खामोशियों के लफ्ज़

    02 August 2015

    खामोशियों के लफ़्ज़ों को पढ़ने को कह रहे हो, हमारी तन्हाइयों में जाने कब से रह रहे हो, खामोशियों के लफ़्ज़ों को पढ़ने को कह रहे हो, हमारी तन्हाइयों में जाने कब से रह रहे हो, ये बात जुदा है मेरे अफ़साने से, जाने क्या लिख रहे हो, जाने क्या कह रहे हो

  • खुद को समेटने का वक़्त,

    03 August 2015

    टूट कर बिखरने से पहले खुद को जोड़ लिया है, इस ज़िन्दगी ने बिन तेरे बेहतर मोड़ लिया है, टूट कर बिखरने से पहले खुद को जोड़ लिया है, इस ज़िन्दगी ने बिन तेरे बेहतर मोड़ लिया है, कसर नहीं रखी तूने उजाड़ने में उम्मीदें , तभी तुझसे रिश्ता कुछ हद तक तोड़ लिया है

  • कण और बूँद

    03 August 2015

    धरा का जो कण एक बूँद का प्यासा है, वो कण मिटटी का दिया हुआ दिलासा है धरा का जो कण एक बूँद का प्यासा है, वो कण मिटटी का दिया हुआ दिलासा है पत्तों पर ठहरी हुई बूंदों का इंतज़ार, जाने किस कण की प्यास बुझाता है, प्रतीक्षा में बूँद भी है और कण भी है, धरा पर...

  • हिन्द सरताज कलाम साहेब और उनके ख़ानदान के नाम

    06 August 2015

    सज़दे में सर खुद ब खुद झुक जाता है, जब इंसान इंसानियत निभाता जाता है इंसानियत से हर दिल का गहरा नाता है, मजहब दीवार नहीं होता कंही ये तो दिलों को जोड़ने का पुराना साँचा है, वो जो फकीरी में गुजर करने पे हैं आमादा, फरिश्तों के ओहदों से उन्हें ही नवाजा जाता...

  • चिराग घर का यूँ रौशन हो

    06 August 2015

    चिराग रौशन रहे घर का सबके, इंसानियत का लहू बहे रग में सबके, ना हो दौलत का कभी नशा हावी, इंसान को इंसान समझे जां के सदके ज़िन्दगी यूँ गुजरे के नाम हो उसका, ज़ुबाँ पे सबके

  • दोस्त मान जाए

    07 August 2015

    तेरे रूठ जाने से दर्द मेरा बढ़ ही गया होगा, जाने वो भी क्या दौर होगा, जिसमे दोस्त का दोस्त हमदर्द रहा होगा

  • सलाम का अंदाज़ जुदा

    08 August 2015

    दुआ से सलाम तक नमस्ते से प्रणाम तक, आदाब से राम राम तक, गुड मॉर्निंग से गुड नाईट तक बनता है सब कुछ, मगर आपका हक़ बनता है, गुलजार से ख़य्याम तक सत्श्रीकाल जी

  • शहीदों की बेबसी

    08 August 2015

    सर पर कफ़न भी बेमानी बांध लेते हैं, वतन की खातिर जो तिरंगे पे जान देते हैं, हाथों में बेड़ियां पहने वो राजनीती की, हिन्द का जनूँ लिए हिन्द पे जान देते हैं, नमन है ेऐसे वीरों को माँ भारती तेरे, जो मिट जाते हैं तेरे लिए लहू को मान देते हैं जय हिन्द

  • चाहतों से सांसें

    09 August 2015

    कहते हैं चाहतें हैं तब सांसें चल रही हैं नहीं तो जाने कबसे ज़िन्दगी सम्हल रही है सांसों से कहना चाहतों ने भी इंतज़ार किया है, वो चलती रहें तभी तो उनके बसेरों से प्यार किया है

  • पंजाब का रंग

    10 August 2015

    बिना ढोल नगाड़े के सरदार सरदार कैसा, बिना ठुमकों के तो पंजाब है अत्याचार जैसा, कभी कभी ही पहुँचते हैं कदम वाहेगुरु के दर, गुरुबाणी के शब्द सुनकर हो जाता है प्यार एैसा, करता है सूरज हर सुबह हर जीव का सत्कार जैसा खालसा फ़तेह

  • अकेलापन (एक दोस्त की ख्वाहिश पर)

    12 August 2015

    ये दुनिया का जो मेला है, यंहा हर एक मिलता अकेला है, कहने को तो महफ़िल भी है, महफ़िल में तन्हा एक दिल भी है, मिलता नहीं अब वो जो इस दिल से खेला है, जिसने लगा रखे हैं नकाबों पे नकाब, वो असली चेहरा भूल चूका ये भी एक झमेला है, सोचता है के कारवां है साथ, पर...

  • बसेरा .......... दिलों में

    13 August 2015

    किसी का दिल में उतर जाना, किसी का दिल से उतर जाना, ये मंज़र जुदा जुदा हैं , जिन्हे फकत आशिकों ने हैं जाना, है दुनिया के भी दस्तूर यही, किसी को दिखावे में है जीना, किसी को सच का ही है जाम पीना, ज़िन्दगी ने दोस्त मगर हर एक को पहचाना, किसी का दिल में उतर जाना,...

  • बाल श्रमिकों ......से आरजू

    13 August 2015

    कुछ वक़्त और बीते, इनकी आखों में बेबसी ना मिले चिंगारियां हों, गिरेबां हो हुक्मरानो के बन्दूको की क्यारियां हों, अपने हक़ के लिए हो रही प्रतिशोध की तैयारियां हो, ज़िन्दगी पे रश्क हो जाए वो ही बस कारगुजारियां हों तमन्ना है के तुम्हारे बच्चो को गुलशन मिलें,...

  • जिस्म से ........कफ़न तक

    18 August 2015

    आ दोस्त कफ़न का रवाज बदल देते हैं, वतन के नाम अब ये दिल ये तन देते हैं, वही पुराने रस्मो रिवाज जलाने दफनाने के, क्यूँ ना चल अविष्कारों के राज बदल देते हैं, जान जब रह ही जानी नहीं है, फिर खुदा की मेहरबानी का ही हम साज़ बदल देते हैं

<< < 1 2 3 4 > >>