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  • छूटा बचपन......... या इंसान की फितरत

    21 August 2015

    ये भोलापन बचपन साथ क्यों ले जाता है, इंसान तो बड़ा हो जाता है, बड़प्पन छूट क्यों जाता है, कुछ हैं जिनके अल्फ़ाज़ अब भी निकलते होंगे दिल से, बचपन की नादानियां याद करके वक़्त ठहर क्यों जाता है, हर इंसान में खुदा का अंश होता जरूर है दोस्त, किसी में नज़र आता है...

  • वतन की कलम से .................

    21 August 2015

    जब वतन में पनपने वाली समस्याओं से जूझता हुआ आम इंसान निराश होने लगे, खुद को कमजोर और असहाय महसूश करे तो और कुछ बदलने की चिंगारी हो जो दब रही हो, तब ये पंक्तियाँ उम्मीद है हौसला बढ़ा सकें ............. तरकश रखता हूँ दुआओं के , उम्मीदों के तीर रखता हूँ,...

  • आज की धड़कने ...........(III)

    23 August 2015

    सुबह ने अंधियारे मिटा दिए है आज के, सूरज ने दे दिए जीवन में उजाले विश्वाश के, चलो बाँट लें ये पल पल दुआओं के एह्साश के, जब हुआ एह्साश ये फकत आपके अल्फ़ाज़ है मोहब्बत नहीं, दूरियों के दामन हमारे और भी थे करीब आ गए, रूबरू तो होते रहे थे हम मगर, फासले भी थे...

  • पंजाब का दर्द............ विदेशों से

    23 August 2015

    पंजाब मेरे देश का वो परिवेश, जिससे शोभित था हर मन विशेष, गुरुओं की वाणियां और कौल सरदारो के, खाता था कसमें वक़्त भी वफादारों से, फिर आज एक दौर सा है चल पड़ा, हर दूसरा था पंजाब छोड़ विदेश निकल पड़ा, वो भी था गवारा के चलो कमाना था घर के लिए, कमाया भी वतन आया...

  • इश्क के अंदाज़ ये भी ...............

    24 August 2015

    तू नज़र आ जाए इंतज़ार के लम्हे भी ये चाह रखते हैं, बाद मुद्दत तूने रुख किया तो है इस डगर का, हम डगर का शुक्रिया आवारगी में हजारों बार करते हैं, कभी रुकना कभी चलना कभी जुल्फों के अंदाज़ बदलना, तेरी हर अदा पर खुद को जख्मी हम यार करते हैं , तूने हम पर नज़र डाली...

  • आज की धड़कने.......... (IV)

    24 August 2015

    सुबह तेरे रंगों में से रंग अपने ले रहा हूँ, ख्वाब जो पूरा ना हुआ अधूरा ही तुझे मैं दे रहा हूँ, कहते हैं तू लौटा देती है मुकम्मल करके, झोलियाँ तेरी आबाद रहे दुआएं ये मैं दे रहा हूँ वो आजमाते हैं उस यकीन की हद तक, जँहा पहुंचकर भरोसे टूट जाया करते हैं ,...

  • जीने का एक अंदाज़.... ये भी

    25 August 2015

    गम से घबराता तो मैं भी रहा हूँ, नाउम्मीदी में उम्मीद लिए जी ही रहा हूँ, टूटना तो पत्थरों का नसीब है ही शायद, तराश दे कोई इस चाह में जहर भी पी रहा हूँ. नहीं बनना मुझे किसी मंदर की मूरत, मैं फकत रास्तों को मुकम्मल सी रहा हूँ, यूँ तो ज़िन्दगी के तजुर्बों...

  • आज की धड़कने.......... (V)

    29 August 2015

    सूरज के उजालों की चलो इबादत कर लें, चंद खुशियों और दुआओं से झोलियाँ भर लें, वो किरणों की सौगाते, वो बूंदों की बरसातें, चलों कुछ ज़मी से आसमा की हम बाते कर लें, गुलों की महक सा हो जाए अंदाज़ आपका, जिस तरफ से गुजरें महक जाए ख्वाब आपका शोहरत के आसमा पर छा...

  • आज की धड़कने .... (VI)

    30 August 2015

    दौलत की मोहब्बत तेरी मोहब्बत से बढ़कर पायी हमने, इसके फेर में दुनिया की कई शै अपनों से पायी है परायी हमने, जो सोच कर निकला तो था धन को पालूं प्रेम के लिए, एक मोड़ पर जाकर देखा तो पाया प्रीत लफ्ज़ को हरजाई हमने, सुबह ने याद किया हमें मुस्कराते हुए, हमने याद...

  • (रिटायरमेंट का.... दर्द)

    31 August 2015

    कुछ को देखा जब उम्र की एक दहलीज़ के पार, काम से मिली थी निजात वक़्त गुजरता था साथियों के साथ, सोचा था उसने वो दिन भी आएंगे उसके, जब गुजरेंगे दिन कुछ इत्मीनान कुछ सकूँ के उसके, वो दिन आ तो गया जब काम से थे रिटायर हो गए, पर जब देखा तो पाया घर वालों को अजीब...

  • आज की धड़कनें .......(VII)

    31 August 2015

    ना छेड़ इंसा तू इन नादान जीवों को, नहीं तू जानता इनके जख्मो और नीवों को, अगर तू प्यार देता इन्हे जाएगा, शेर भी तेरे आगोश में मुस्कराएंगा, और अगर तूने इनकी बेबसी पर है सितम ढाया, चींटी हो या वानर काफी है तुझे गिराने को तस्वीरें जहन की दास्ताँ बदल ना पाएंगी,...

  • एह्साश...... पाषाण के

    01 September 2015

    इस पाषाण का उस धरा को सलाम है, जिसकी मिटटी मस्तक रही सदा, जिसने तराशा मंदर के लिए उसका इंसान नाम है, पर उसने पाया नहीं खुदा, मुझे संवारा गया अपनी सुविधाओं के लिए, मैं रखता गया खुद पर खुद को, आज देखता हूँ अट्टालिकाओं में मेरा नाम है, मेरे एहसासों को छूता...

  • आज की धड़कने ......(VIII)

    01 September 2015

    सरहदें मिटाने को हमने इंसान को है तैयार पाया, नहीं समझ पाये जो थे शैतान बेगुनाहों का जिसने था लहू बहाया तुझे हुस्न पर गुमान जबसे था हो गया, हर तरफ मौसम था बेजान हो गया, खुद को इतना तूने था मशहूर किया, चर्चा तेरे जज्बात का था खो गया देखा हो गया ना जलवा...

  • आज की धड़कने ....... (IX)

    03 September 2015

    जंगलों को परिंदों ने छोड़ा तो है बेबसी में शायद, इंसा ने उनके बसेरे उजड़े घरौंदों की तलाश है शायद संघर्ष की दिशा का चयन गर सही ना हो पाये, तो फिर इंसान ता उम्र संघर्ष में ही बीती पाये, कभी पता भी नहीं चलता वक़्त के बहाव में, के हमने संघर्ष भी किया पल फ़िज़ूल...

  • कोई जानता यूँ है........ मुझे

    06 September 2015

    मैं कतरा लिखता हूँ वो समंदर मानता है , ज़िन्दगी शायद वो मुझसे बेहतर जानता है, पिने को पीता हूँ अश्क बेतकल्लुफ होकर जब, वो मेरी हंसी को भी ग़मों का घर मानता है, चाहत की बातें वो करता रहता है अक्सर, मैं टूटता नहीं हूँ ये वो बेहतर जानता है, मेरे वज़ूद में जो...

  • आज की धड़कने ....... (X)

    06 September 2015

    भोर आज की कुछ दर्द ले तो आई है, पर सूरज की किरणे दुआएं साथ भी लायी हैं, किसी दोस्त की सुबह ना कभी ग़मज़दा हो, आपके दिन का पल पल खुशियों से भरा हो मजहब जिनका वतन है पहचान ले लेते हैं, सर आँखों पर रखते हैं दिल से नाम ले लेते हैं जो वतन के होते नहीं धर्माधिकारी...

  • जन्मास्टमी पर व्यथा....... मन की

    06 September 2015

    कान्हा तेरे रूप को आँखों में बसाकर अश्क बहाता हूँ मैं, इस तरह इस ज़मी को छू कर तेरे चरण सहलाता हूँ मैं, जाने कब उभर आये वो बीती सदियाँ करवटें लेकर, तेरी यादों का हर जन्मदिन पर तेरे कारवां सजाता हूँ मैं, देख मीरा को तो तू भी नहीं भुला होगा, जहर है जीवन...

  • जो कहते हैं ज़िन्दगी....... अब वतन है

    06 September 2015

    वतन की मोहब्बत से दोस्त जब तू अपनी मोहब्बत मांग लेगा, उस दिन तुझे हर पहचानने वाला अपने मेहबूब का शायर कहेगा उसकी ज़िन्दगी बन जाओ जिसकी ज़िन्दगी वतन हो, फिर मिल के बिखर जाओ जन्हा तक जीवन का सफर हो गर ज़िन्दगी तेरी वतन है तो सांसों में रहता वजन है, जब तमन्ना...

  • आज की धड़कने........ (XI)

    06 September 2015

    तेरे अल्फ़ाज़ों को कोई शायर भी बना देगा सब्र रख, किसी को बना अपना ज़रा अपने हुस्न पर भी नज़र रख, जब कभी जिक्र दोस्त तेरे अश्कों का होगा, दर्द तेरा तू मान ले कुछ हमने भी सहा होगा, आजमाइश आपकी नहीं हम खुद की कर रहे हैं, धोखे से ही सही जज्बातों की माला बुन रहे...

  • खुद से कारवां........ तक

    08 September 2015

    मैं जब खुद से कारवां हो गया, तन्हा ना रहा गुलिस्तां हो गया, जिसने समझा था कभी मुझे बेबस ,आज उसके लिए मैं एक निशा हो गया पहले गुजरता था पगडंडियों से मैं, आज सुलगती राहो का मैं समाँ हो गया, कभी जब खुद को अकेला पाये इंसा, किसी बेहतर कारवां से खुद को मिलाये...

  • आज की धड़कने ........ (Xii)

    07 September 2015

    हम बेवफाई भी वफ़ा के साथ करते हैं, गर फना हो जाए कोई तो ही जफ़ा करते हैं, ऐसा नहीं के मतलब से ही ढूंढा गया हो आपको, बेमतलब बिताया वक़्त शायद याद नहीं आपको, बेवफाई का इश्तहार मैंने लगा तो दिया है, खाली ना चला जाए तभी अपना नाम दिया है, इलज़ाम सहने की तो अपनी...

  • ज़िन्दगी के अफ़साने .........

    07 September 2015

    खुश तो कम ही मिलेंगे जमाने से, शायद थक गए हो निभाने से, कुछ शिकवे भी होंगे ज़माने से, बात बन जायेगी दो कश लगाने से, एक ज़िन्दगी का हो दूसरा दोस्ती का, थोड़ा जाम गम का हो थोड़ा ख़ुशी का, चल यार अब दिल्लगी छोड़ भी दे बहाने से, आ नींद से सुबह मांग लें ठिकाने से...

  • बचपन से मज़दूरी करवाने का......... जुर्म

    09 September 2015

    नन्हे कन्धों पर रख देते हैं बोझ, चंद दौलतमंद अपने मतलब के लिए, दौलत के नशे में हो जाते हैं अंधे, अपने गोरख धंधे के लिए, किसी बचपन पर जुर्म है मज़दूरी, जो करवा रहा है उसकी आत्मा नहीं पूरी, फिर इन्ही में कुछ होते हैं जो दान देते हैं, मंदर मस्जिदों के स्तम्भो...

  • बचपन जाने...... ना पाये

    09 September 2015

    बचपना जवान हो चूका पर बचपना तो है, करतें हैं नादानियाँ हमने सुना तो है, वो गया वक़्त भी देख कर हमें मुस्कराता होगा, जो था बचपन का दोस्त अब हमनवां तो है, कभी कभी गुजरता है वो वक़्त बचपन का अब भी, राहों पर जब हमने फिर खेले हैं कंचे, तुमने सुना तो है, अभी...

  • तारीफों की ........दास्ताँ

    09 September 2015

    वो बना देता है हस्तियां तारीफ़ के काबिल, जिसने बनायीं दुनिया तारीफ़ के काबिल, आपके हर हुनर पे जब दिल से दाद होगी, कम हो या हो ज्यादा हमेशा याद होगी, मतलब की तारीफें पहचानते हैं सब, बिना किये भी लोग कहा मानते हैं अब, दिल से निकली वाह और आह अब एक साथ होगी,...

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