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इश्क की मुलाकातें

चाहत में यादों की बसर तो हो ही जाती है, नशे में मोहब्बत के खुमारी हो ही जाती है, धड़कता है दिल ेऐसे उनके रूबरू होने पर, हर धड़कन फकत उनको ही गुनगुनाती है, मगर जब वो लौटने की बात करते हैं, दिल डूबने लगता है उदासी छा सी जाती है , फिर वो मुस्करा कर करते हैं...

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बरसते बादल

बादलों की टोलियां आसमान से ही आती है, बूंदें बरसातों की रह रह के गुनगुनाती हैं, धरा चल थोड़ा तुझको भिगालें हम, हलकी चले पवन तो पत्ते पत्ते को सजा लें हम, बूंदें जो ठहर गयी पेड़ों की शाखों पर, ज़मी के कुछ जर्रों की प्यास बुझा जाती हैं जाने सहरा में कहा बरसातें...

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चाहतों से सांसें

कहते हैं चाहतें हैं तब सांसें चल रही हैं नहीं तो जाने कबसे ज़िन्दगी सम्हल रही है सांसों से कहना चाहतों ने भी इंतज़ार किया है, वो चलती रहें तभी तो उनके बसेरों से प्यार किया है

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शहीदों की बेबसी

सर पर कफ़न भी बेमानी बांध लेते हैं, वतन की खातिर जो तिरंगे पे जान देते हैं, हाथों में बेड़ियां पहने वो राजनीती की, हिन्द का जनूँ लिए हिन्द पे जान देते हैं, नमन है ेऐसे वीरों को माँ भारती तेरे, जो मिट जाते हैं तेरे लिए लहू को मान देते हैं जय हिन्द

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सलाम का अंदाज़ जुदा

दुआ से सलाम तक नमस्ते से प्रणाम तक, आदाब से राम राम तक, गुड मॉर्निंग से गुड नाईट तक बनता है सब कुछ, मगर आपका हक़ बनता है, गुलजार से ख़य्याम तक सत्श्रीकाल जी

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जंग दोस्ताने में

बन्दूक की गोली सा रूठ जाते हैं दोस्त, रूठना है कंही , निशाना कंही लगाते हैं दोस्त, यूँ तो जंग का इरादा होता है कभी कभी, पर जुबा की तीरंदाज़ी रोज दिखाते हैं दोस्त, कुछ ेऐसे भी मिल पड़े हैं इस राह में हमसे, शोहरत और दौलत के ढेर पर खड़े हाथ मिलाते हैं दोस्त,...

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जिन्दगी एक नज़र यूँ भी

जीते जीते एक पल को ठहर गया हूँ मैं, ज़िन्दगी तुझे क्यों लगा के ज़ी गया हूँ मैं, अब ढोता हूँ तेरे दिए लम्हों को मैं , दुनियादारी तेरे भरोसे भी कब रहा हूँ मैं माना के हर तरफ शोर है तेरे होने का, तू नहीं है ये सोच कर भी तो जी रहा हूँ मैं, चंद रौनकें, चंद निवाले...

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(झुलसते जज्बात)

तितलियों के पंख झुलश गए होंगे, जब सूरज ने तीखे अल्फ़ाज़ कहे होंगे, हवाएँ भी थम सी गयी होंगी , बादल जब तक ना बरस गए होंगें, मैं तो बेबस था पीना ही था ज़िन्दगी का जहर , तेरे दिलासे भी क्या बेवजह रहे होंगे, कभी जाना नहीं किसी ने हाल दिल का, हमने भी तो आखिर...

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दोस्त मान जाए

तेरे रूठ जाने से दर्द मेरा बढ़ ही गया होगा, जाने वो भी क्या दौर होगा, जिसमे दोस्त का दोस्त हमदर्द रहा होगा

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