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दिल की जुबाँ ......ऐसी भी

शायद दिल की जुबाँ समझने का दिल हो रहा होगा, खामोशियों ने भी नींदों में कुछ तो कहा होगा, कोई मुद्दत बाद जागा होगा जो सो रहा होगा, कंही नसीब अपने अंजाम पर भी रो रहा होगा, दिल से निकली आहों का बयां कंही हो रहा होगा, समझ कर जबाँ दिल की कोई दर्द सह रहा हो...

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आज की..... धड़कने (II)

सुबह ने दुआओं के द्वार खोले हैं, सूरज ने पहनाये किरणों के चोले हैं, पवन लहरा रहा है आँचल धरा का, पंछियों ने चहचहाकर यारों के सत्कार बोले हैं, उनका कहना है के सज़ाएं बाँट लो चलो ख़्वाबों में आकर, हक़ीक़त में सज़ाएं बाँट कर ख्वाबों की बात करते हैं , मुस्कराते...

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जिस्म से ........कफ़न तक

आ दोस्त कफ़न का रवाज बदल देते हैं, वतन के नाम अब ये दिल ये तन देते हैं, वही पुराने रस्मो रिवाज जलाने दफनाने के, क्यूँ ना चल अविष्कारों के राज बदल देते हैं, जान जब रह ही जानी नहीं है, फिर खुदा की मेहरबानी का ही हम साज़ बदल देते हैं

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इश्क के........ अरमान

उम्र मेरे इश्क की कम करता नहीं खुदा, झोलियाँ मुरादों से भी भरता नहीं खुदा, सुना है के शख्सियत बनाने में महारथ है तुझे, तेरे हुनर का रंग मुझमे क्यूँ दीखता नहीं जुदा, इश्क में बातों से दीदार तक की हसरत, होती सबको है तो क्यूँ वो मुलाकात रखता नहीं खुदा, तमन्ना...

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आज की धड़कने .............

सूर्य की बादलों में अटखेलियां हैं हो रहीं, इंसान के जीवन की फिर एक सुबह है हो रही, भोर की किरणे दुआए दे रही हैं यूँ, धरा भी जैसे हर छन पुलकित पुलकित हो रही, संघर्ष की दिशा का चयन गर सही ना हो पाये, तो फिर इंसान ता उम्र संघर्ष में ही बीती पाये, कभी पता...

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आज़ाद वतन

आज़ाद वतन है हर साँस वतन है, आवाम को तिरंगे का ेअहसास वतन है, शहीदों ने जिसे लहू से सींचा वो खास वतन है, हर एक का अपना अपना योगदान रहा है, कोई विद्या से निभाता, कोई माटी अन्न उगाता, कोई सीना छलनी करता, कोई सर कफ़न हो जाता,, वीरों की भूमि है ये तब ही तो...

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बाल श्रमिकों ......से आरजू

कुछ वक़्त और बीते, इनकी आखों में बेबसी ना मिले चिंगारियां हों, गिरेबां हो हुक्मरानो के बन्दूको की क्यारियां हों, अपने हक़ के लिए हो रही प्रतिशोध की तैयारियां हो, ज़िन्दगी पे रश्क हो जाए वो ही बस कारगुजारियां हों तमन्ना है के तुम्हारे बच्चो को गुलशन मिलें,...

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बसेरा .......... दिलों में

किसी का दिल में उतर जाना, किसी का दिल से उतर जाना, ये मंज़र जुदा जुदा हैं , जिन्हे फकत आशिकों ने हैं जाना, है दुनिया के भी दस्तूर यही, किसी को दिखावे में है जीना, किसी को सच का ही है जाम पीना, ज़िन्दगी ने दोस्त मगर हर एक को पहचाना, किसी का दिल में उतर जाना,...

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धरा से ………………किसानो की मौत तक

चिंगारियों की शोलों में ज़िन्दगानियां हैं, बुझ के भी तो रह जाती निशानियाँ हैं राख में लिपटी हुई जाने कितनी कहानियां हैं, माटी का सीना चीर कर अनाज का जीवन लिया उस बीज की भी तो अपनी कहानियां हैं, पर उस बीज को बोने वालों की मौतें हो रही, धरती तेरे दामन में...

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