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साये और....... तन्हाई

रेतों पर चलना सायों का मचलना, ज़रा आपका रुकना धुप का सम्हलना, अक्श याद आना आपका मुस्कराना, क़दमों को दोस्त जरा हौले बढ़ाना, मुश्किल बहुत है इश्क को भूल पाना, तन्हाइयों से सीखा है हमने गुनगुनाना

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आज की धड़कने .... (VI)

दौलत की मोहब्बत तेरी मोहब्बत से बढ़कर पायी हमने, इसके फेर में दुनिया की कई शै अपनों से पायी है परायी हमने, जो सोच कर निकला तो था धन को पालूं प्रेम के लिए, एक मोड़ पर जाकर देखा तो पाया प्रीत लफ्ज़ को हरजाई हमने, सुबह ने याद किया हमें मुस्कराते हुए, हमने याद...

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मोहब्बत की..... नींदें

नींद तुझे आ जाये ये मुमकिन तो है, याद करे मुझे और जाग जाए ये मुमकिन तो है, फिर करवटों में रात बीते ये मुमकिन तो है, सुबह कोई मिलने आये ये मुमकिन तो है

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आज की धड़कने.......... (V)

सूरज के उजालों की चलो इबादत कर लें, चंद खुशियों और दुआओं से झोलियाँ भर लें, वो किरणों की सौगाते, वो बूंदों की बरसातें, चलों कुछ ज़मी से आसमा की हम बाते कर लें, गुलों की महक सा हो जाए अंदाज़ आपका, जिस तरफ से गुजरें महक जाए ख्वाब आपका शोहरत के आसमा पर छा...

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हुस्न .......रवायत

क्यों न खुद पर कुछ करम किया जाये, खुद को संवार कर नज़रबंद किया जाये चंद महकते गुलों से एै दोस्त, खुशबुओं को फिर से हुनर मंद किया जाए,

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प्रेम ......पांति

प्रेम के हो जाने से लिखे जाने तक, अश्क के बहने से मुस्कराने तक, इंतज़ार के लम्हों को मुकम्मल पाने तक, धड़कनों के राग बदलते जाते हैं, दिलों की बस्तियों पर सहर आने तक, बीत जाती है उम्र लौट कर घर आने तक चंद दिनों में जीता है एक उम्र हर एक, मुहब्बत बदलती जाती...

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दलितों को........ दलित कहने पर

इस दर्द से गुजरते गुजरते देख कहा तक आ गए, इतना बदलकर भी देखा तो जख्म हरा ही पा गए वो कहते मिले के हमने तुम्हे इंसान माना, जो थे आज इंसानियत बेच कर खा गए, खुदा ही जाने तुझे वो अगला जन्म क्या देगा, इंसान यक़ीनन नहीं बनाएगा काफी है जीव का जन्म गर पा गए

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माँगा कुछ यूँ...... रब से

खुदा मेरे सोचने की सीमायें असीमित कर दे, दिल को रूहानियत के एह्साश से भर दे, लफ्ज़ निकले तो लोगों करार पहुंचे, मिल के हो जाए शख्सियत बेक़रार वो कर दे, लिखूं आसमा तो जमी साथ देती मिले, छू लूँ गर आग तो हवा साथ देती मिले , तेरा ही अक्स नज़र आये पढ़ कर जो याद...

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दर्द की डगर.....ऐसी भी

अब याद नहीं रखता के गम क्यूँ है, ज़िन्दगी हवाले कर दी करम यूँ है. तभी तो गम से भी याराने हो गए, वो जो गम देने आये खुद ठिकाने हो गए, एक ठंडक सी आँखों में उभर जाती है, साँस अब इत्मीनान से आती है जाती है, शिकवों से भी तौबा हो चली अब तो, उनकी तड़प पर हमारी...

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