Overblog Follow this blog
Administration Create my blog

आज़ाद वतन

आज़ाद वतन है हर साँस वतन है, आवाम को तिरंगे का ेअहसास वतन है, शहीदों ने जिसे लहू से सींचा वो खास वतन है, हर एक का अपना अपना योगदान रहा है, कोई विद्या से निभाता, कोई माटी अन्न उगाता, कोई सीना छलनी करता, कोई सर कफ़न हो जाता,, वीरों की भूमि है ये तब ही तो...

Read more

बाल श्रमिकों ......से आरजू

कुछ वक़्त और बीते, इनकी आखों में बेबसी ना मिले चिंगारियां हों, गिरेबां हो हुक्मरानो के बन्दूको की क्यारियां हों, अपने हक़ के लिए हो रही प्रतिशोध की तैयारियां हो, ज़िन्दगी पे रश्क हो जाए वो ही बस कारगुजारियां हों तमन्ना है के तुम्हारे बच्चो को गुलशन मिलें,...

Read more

बसेरा .......... दिलों में

किसी का दिल में उतर जाना, किसी का दिल से उतर जाना, ये मंज़र जुदा जुदा हैं , जिन्हे फकत आशिकों ने हैं जाना, है दुनिया के भी दस्तूर यही, किसी को दिखावे में है जीना, किसी को सच का ही है जाम पीना, ज़िन्दगी ने दोस्त मगर हर एक को पहचाना, किसी का दिल में उतर जाना,...

Read more

धरा से ………………किसानो की मौत तक

चिंगारियों की शोलों में ज़िन्दगानियां हैं, बुझ के भी तो रह जाती निशानियाँ हैं राख में लिपटी हुई जाने कितनी कहानियां हैं, माटी का सीना चीर कर अनाज का जीवन लिया उस बीज की भी तो अपनी कहानियां हैं, पर उस बीज को बोने वालों की मौतें हो रही, धरती तेरे दामन में...

Read more

मौत ..........जाते जाते

जख्मी हो जाते हैं दफनाते वक़्त हाथ जिनके, अँधेरे आसुओं में बह जाते हैं दिन रात उनके, यादें तो परछाई हो ही जाया करती हैं, लगा के जो रखते हैं दिल से जज्बात उनके, फिर वक़्त के साथ बदल जाती है परछाइयाँ, नए हो जाते हैं जज्बात और नए हालात उनके मौत का निशाँ गहरे...

Read more

जिंदगी और मेरे अंदाज़

ज़िन्दगी तुझे जीने के अंदाज़ बयां हो गए , तेरी खूबसूरती के देख कंहा कंहा निशाँ हो गए , कभी ठोकरों पे लिया, कभी वीरानो में दिया पांव जख्मी तेरे मेरी मंज़िल के निशाँ हो गए, वो भी था वक़्त जब तमन्नाओं की आंधी सी थी, जाने कितने लम्हे तेरी चाहत में फना हो गए,...

Read more

अकेलापन (एक दोस्त की ख्वाहिश पर)

ये दुनिया का जो मेला है, यंहा हर एक मिलता अकेला है, कहने को तो महफ़िल भी है, महफ़िल में तन्हा एक दिल भी है, मिलता नहीं अब वो जो इस दिल से खेला है, जिसने लगा रखे हैं नकाबों पे नकाब, वो असली चेहरा भूल चूका ये भी एक झमेला है, सोचता है के कारवां है साथ, पर...

Read more

तन्हाइयों की दास्ताँ

पहचानता हूँ शहर को फिर भी क्यूँ अनजान हूँ, रास्तों से गुजर चूका हूँ भूल चुका नादान हूँ , कुछ दूर चलता हूँ कारवां संग, फिर खुद को तन्हा कर के घूमता वीरान हूँ, महफ़िलों में दखल मेरा फिर भी मैं सुनसान हूँ, बहलाता हूँ मैं दिल सभी का, खुद का पर दिल ना बहले...

Read more

चलो खुदाई का दर सजालें

गुजर जाना हर हद से खुदाई के तरानों में, ज़माने लग जाते हैं दोस्त, खुदा का दर सजाने में, सजा ले कोई भी दैरो - हरम तो क्या होगा, इबादत में लिखे लफ्ज़ गुनगुना ले तो क्या होगा, मज़ा तब है जब लफ्ज़ निकले खुदा की याद आने में, ऐसी सजावट है मिलती खुदा के ही दीवाने...

Read more
<< < 1 2 3 4 5 6 7 > >>