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हिन्द में पाकिस्तान के परचम फहराने का अंजाम

सर कलम कर देना होगा उस नामुराद खबीज़ का, जो हमारे वतन का खा पहन कर हो ना पाया ज़मीर का, तिरंगे के अलावा गर हाथों में पाक का परचम दिखे, हाथ काट दिए जाएँ, जिस्म टाँग दो चौराहे पर, सबक हो जाए गद्दारों के लिए, फौजियों को सलाम हो वीर का जय हिन्द

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वतन की कलम से .................

जब वतन में पनपने वाली समस्याओं से जूझता हुआ आम इंसान निराश होने लगे, खुद को कमजोर और असहाय महसूश करे तो और कुछ बदलने की चिंगारी हो जो दब रही हो, तब ये पंक्तियाँ उम्मीद है हौसला बढ़ा सकें ............. तरकश रखता हूँ दुआओं के , उम्मीदों के तीर रखता हूँ,...

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छूटा बचपन......... या इंसान की फितरत

ये भोलापन बचपन साथ क्यों ले जाता है, इंसान तो बड़ा हो जाता है, बड़प्पन छूट क्यों जाता है, कुछ हैं जिनके अल्फ़ाज़ अब भी निकलते होंगे दिल से, बचपन की नादानियां याद करके वक़्त ठहर क्यों जाता है, हर इंसान में खुदा का अंश होता जरूर है दोस्त, किसी में नज़र आता है...

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वतन के रखवालों के नाम

समंदर की सीमाओं पर डटे सैनिकों को सलाम है, जबां जबाँ पुकारती फकत वतन और तिरंगे का नाम है, लहरों और तूफानों ने जिनको है ये सीखा दिया, हर मुश्किल घडी में भी दुश्मन के इरादे करना नाकाम है, लहू का कतरा कतरा शहीदों का पुकारता बस अब नाम है, आसमा तुझ पर दस्तखत...

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दिल की जुबाँ ......ऐसी भी

शायद दिल की जुबाँ समझने का दिल हो रहा होगा, खामोशियों ने भी नींदों में कुछ तो कहा होगा, कोई मुद्दत बाद जागा होगा जो सो रहा होगा, कंही नसीब अपने अंजाम पर भी रो रहा होगा, दिल से निकली आहों का बयां कंही हो रहा होगा, समझ कर जबाँ दिल की कोई दर्द सह रहा हो...

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आज की..... धड़कने (II)

सुबह ने दुआओं के द्वार खोले हैं, सूरज ने पहनाये किरणों के चोले हैं, पवन लहरा रहा है आँचल धरा का, पंछियों ने चहचहाकर यारों के सत्कार बोले हैं, उनका कहना है के सज़ाएं बाँट लो चलो ख़्वाबों में आकर, हक़ीक़त में सज़ाएं बाँट कर ख्वाबों की बात करते हैं , मुस्कराते...

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जिस्म से ........कफ़न तक

आ दोस्त कफ़न का रवाज बदल देते हैं, वतन के नाम अब ये दिल ये तन देते हैं, वही पुराने रस्मो रिवाज जलाने दफनाने के, क्यूँ ना चल अविष्कारों के राज बदल देते हैं, जान जब रह ही जानी नहीं है, फिर खुदा की मेहरबानी का ही हम साज़ बदल देते हैं

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इश्क के........ अरमान

उम्र मेरे इश्क की कम करता नहीं खुदा, झोलियाँ मुरादों से भी भरता नहीं खुदा, सुना है के शख्सियत बनाने में महारथ है तुझे, तेरे हुनर का रंग मुझमे क्यूँ दीखता नहीं जुदा, इश्क में बातों से दीदार तक की हसरत, होती सबको है तो क्यूँ वो मुलाकात रखता नहीं खुदा, तमन्ना...

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आज की धड़कने .............

सूर्य की बादलों में अटखेलियां हैं हो रहीं, इंसान के जीवन की फिर एक सुबह है हो रही, भोर की किरणे दुआए दे रही हैं यूँ, धरा भी जैसे हर छन पुलकित पुलकित हो रही, संघर्ष की दिशा का चयन गर सही ना हो पाये, तो फिर इंसान ता उम्र संघर्ष में ही बीती पाये, कभी पता...

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