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16 Sep

आज की धड़कने .....(XVI)

Published by Sharhade Intazar Ved

आज की धड़कने .....(XVI)

सुबह के उजालों ने याद दिलाया,
खुदा फिर आज है हमारे दर पर आया,
ख़ुशी हो या गम ये अपना अपना नसीब ,
जीवन की सौगात दे फिर एक दिन बढ़ाया ,
दोस्त खुश रहे ये हमने है दिल से गुनगुनाया

आँखों की तड़प का जो तुझे अंदाज़ हो जाए,
हर हंसी नज़ारे का तू हंसी साज हो जाए,
मोहब्बत दीदार की भी ख्वाहिश रखती तो है,
गर ये आँखें मेहरबाँ किसी से चार हो जाए

जिन्दा रहने को सांसें मोहब्बत की मिल जाएँ,
हम साँस लें खुदा करे उनकी जान पर बन आये

या अली जय हो भोले नाथ की
उठा बजरंगी पहाड़
मीटा दे दुविधा विषाद की,
हेलो हाय की बिरादरी बेदखल होगी,
कुछ कदर करलो सीता के जज्बात की

रात का आलम उस पर बरसात का मौसम,
चल आ जा नींद तुझे आगोश में ले लें हम

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monika 09/22/2015 11:02

वाह्ह्ह्ह्ह्ह्ह। लाजवाब