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16 Sep

आज की धड़कने ......(XV)

Published by Sharhade Intazar Ved

आज की धड़कने ......(XV)

माँ भारती के आँचल का परचम हो गया होगा,
आपके लफ़्ज़ों का इंकलाब भरकम हो गया होगा

इंसान से मोहब्बत है खुदा को हर सुबह का आना इसका सबूत है,
सूरज के निकलने से चाँद के ढलने तक बस खुदा का ही वजूद है,
दुआओं का सफ़र कुछ आगे यूँ आज करते हैं ,
दोस्तों की ज़िन्दगी ना आये गम फरियाद करते हैं,
ख़ुशी में गुजरे पलों का हर दिल सुक्रिया करता जरूर है,

फेंक कर कफ़न लाश भी थी खड़ी हो गयी,
बोली मत कर इंसा तू दफ़न किसी को बिन बात पर

इंतज़ार के लम्हों से कभी तुम पूछना,
कहेंगे मैं वंही हूँ वंही कंही हूँ

किताबों से याराने हो ना सके,
लफ़्ज़ों के दीवाने हो ना सके,
अजीब ज़िन्दगी का वक़्त गुजरा,
ख्वाहिश के नज़राने भी हो ना सके,

आंसू की बूंदों से प्यास बुझा तो रहे हो,
दिल को क्यूँ बेवज़ा रेगिस्ता बना रहे हो,

Comment on this post

om prkash 09/18/2015 02:24

इंसान से मोहब्बत है खुदा को.........................waah behtreen ,lajwaab

ved 09/18/2015 16:24

shukriya om Bhai