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16 Sep

आज की धड़कने .....(XIV)

Published by Sharhade Intazar Ved

आज की धड़कने .....(XIV)

इक पन्ना ज़िन्दगी का जब पढ़ा मैंने,

कुछ पन्नो से हटा ली बंदगी मैंने,

क्या गज़ब के तूने सितम लिख दिए,

हैराँ हूँ के कैसे ख़ुशी के पल कब लिख दिए,

इस ज़िन्दगी की किताब जब तलक पूरी होगी,

तेरे शुकराने में मेरी तरफ से ना कमी होगी,

ज़िन्दगी के हर पन्ने में हलचल तो है,

जाने कब पढ़े कोई आगे फिर इक कल तो है,

आँधियों का भी दोस्त इक दस्तूर होता है,

वंहा चलती हैं जँहा जुर्म भरपूर होता है,

हैराँ हो जाता है जुर्म करने वाला,

जब उसकी शख्सियत का रूतबा काफूर होता है

Comment on this post

manju 10/30/2015 11:00

very nyc