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07 Sep

आज की धड़कने ........ (Xii)

Published by Sharhade Intazar Ved

आज  की  धड़कने ........ (Xii)

हम बेवफाई भी वफ़ा के साथ करते हैं,

गर फना हो जाए कोई तो ही जफ़ा करते हैं,

ऐसा नहीं के मतलब से ही ढूंढा गया हो आपको,

बेमतलब बिताया वक़्त शायद याद नहीं आपको,

बेवफाई का इश्तहार मैंने लगा तो दिया है,

खाली ना चला जाए तभी अपना नाम दिया है,

इलज़ाम सहने की तो अपनी आदत रही है,

तभी इंसानियत जैसा हमने गुनाह भी किया है

मोहब्बत थी या है इसका फैसला बाकी है दोस्त,

बिन उसके वक़्त गुजारो गुजर पाये तो,

कभी कभी लगेगा किसी ने पुकारा है दोस्त

चमन को उजाडने का भी दस्तूर गज़ब है,

जमीन के टुकड़ों के लिए होता कहर है,

घर खुदा का हो या इंसान का,

बिखरकर दोनों ही पर होता असर है

कुछ में इंसानियत के लिए रहता जहर है

Comment on this post

Ekta 09/14/2015 18:17

Bahut khoob....

ved 09/16/2015 20:52

शुक्रिया मित्र

Om prkash 09/09/2015 01:20

Oh mere khuda kyaa baat hai , kya khoob.hm bevfaayi b vfa ke sath krte hai. Gr fna ho jaaye koyi to hi jfa krte hai .jai ho jai ho jai ho aap ki

ved 09/09/2015 17:38

shukriya om bhai shukriya

monika 09/08/2015 14:06

oh my god ....ye pic to kmaal hi hai ..
bahut sunder

ved 09/09/2015 17:39

sukriya Monika ji