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07 Sep

ज़िन्दगी के अफ़साने .........

Published by Sharhade Intazar Ved

ज़िन्दगी के अफ़साने .........

खुश तो कम ही मिलेंगे जमाने से,

शायद थक गए हो निभाने से,

कुछ शिकवे भी होंगे ज़माने से,

बात बन जायेगी दो कश लगाने से,

एक ज़िन्दगी का हो दूसरा दोस्ती का,

थोड़ा जाम गम का हो थोड़ा ख़ुशी का,

चल यार अब दिल्लगी छोड़ भी दे बहाने से,

आ नींद से सुबह मांग लें ठिकाने से

चमन को उजाडने का भी दस्तूर गज़ब है,

जमीन के टुकड़ों के लिए होता कहर है,

घर खुदा का हो या इंसान का,

बिखरकर दोनों ही पर होता असर है,

कुछ में इंसानियत के लिए रहता जहर है

Comment on this post

Ekta 09/14/2015 18:22

, utkrishth rachna

ved 09/16/2015 20:49

शुक्रिया मित्र

Monika 09/10/2015 17:52

Super.
sachayi hai khush nhi milte log zmaane se , shayad thak hi gye hain nibhane se

ved 09/12/2015 17:20

thanks Monika ji

Om prkash 09/09/2015 01:15

Bahut khoob jnaab waah

ved 09/09/2015 17:41

thanks Om Bhai

monika 09/08/2015 14:03

only pic no other post
kmaal hai.......

ved 09/09/2015 17:42

fir ek bar dekhen Zindagi ke afsane pesh hai