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06 Sep

आज की धड़कने........ (XI)

Published by Sharhade Intazar Ved

आज की धड़कने........ (XI)

तेरे अल्फ़ाज़ों को कोई शायर भी बना देगा सब्र रख,
किसी को बना अपना ज़रा अपने हुस्न पर भी नज़र रख,

जब कभी जिक्र दोस्त तेरे अश्कों का होगा,
दर्द तेरा तू मान ले कुछ हमने भी सहा होगा,

आजमाइश आपकी नहीं हम खुद की कर रहे हैं,
धोखे से ही सही जज्बातों की माला बुन रहे हैं

ये जो तस्वीरों से बाहर निकल आने का आपका हुनर है,
हम भले अनजान हों पर ज़माना कहा बेखबर है,

दर्द और इंतज़ार का भी अपना ही मज़ा है,
समझो तो दिल्लगी ना समझो तो सजा है

Comment on this post

Ekta 09/10/2015 17:56

Waah kya baat hai. Bahut khoob-
Drd or intzaar ka apna hi mza hai
Smjho to dillgi .na samjho to sja hai

ved 09/12/2015 17:22

Sukriya Ekta ji

monika 09/08/2015 14:22

जब कभी जिक्र दोस्त तेरे अश्कों का होगा,
दर्द तेरा तू मान ले कुछ हमने भी सहा होगा,
kyaa baat hai !!!

ved 09/08/2015 17:17

shukriya monika ji

manju 09/07/2015 10:20

bahuut bahuut bahuut khoob

ved 09/08/2015 17:07

shukriya Manju ji

anil juneja 09/07/2015 07:58

वह ना थे तो जिंदगी में उनकी यादें बहुत थी
वह आए तो जिंदगी की संासें बहुत कम थी।
जिनके इंतजार में हम देख रहे थे राहों को
वह आए और बोले हम पर निगाहें बहुत थीं।।

ved 09/08/2015 17:06

khoob Anil Bhai

anil juneja 09/07/2015 07:44

waah kyaa jazbaat byaa kiye hai .lajwaab