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06 Sep

आज की धड़कने ....... (X)

Published by Sharhade Intazar Ved

आज की धड़कने ....... (X)

भोर आज की कुछ दर्द ले तो आई है,
पर सूरज की किरणे दुआएं साथ भी लायी हैं,
किसी दोस्त की सुबह ना कभी ग़मज़दा हो,
आपके दिन का पल पल खुशियों से भरा हो

मजहब जिनका वतन है पहचान ले लेते हैं,
सर आँखों पर रखते हैं दिल से नाम ले लेते हैं
जो वतन के होते नहीं धर्माधिकारी ही क्यों ना हों,
उनकी हम खिलाफत करते नहीं जान ले लेते हैं,
इसी बहाने वतन से वफ़ा का इनाम ले लेते हैं

बंद तकदीर के तालों की तू चाबियाँ रखता होगा ,
वो जो नहीं कहते खोलने ये उनमें खामियां रखता होगा,
हम तुझे शर्मिंदगी की हद तक शुक्रिया कहते रहेंगे,
हमारे मन में बेबसी की भले तू परछाइयाँ रखता होगा,
कब तलक नहीं पसीजेगा मेरे मौला तू आखिर,
तेरा बनाया इंसान हूँ तेरे लिए ही तन्हाइयाँ रखता होगा

यंहा बस्तियों में ज़िंदा कोई मिलता नहीं अब,
हर चेहरे पर चेहरा असली चेहरा दीखता नहीं अब,
ऊंचाइयों को सलाम करते सब मिलेंगे ,
ज़मीर रख कर ज़र्रों से कोई जुड़ता नहीं अब,
मुर्दा है बस्ती फकत कहने को है हस्ती,
बह जाता है नालियों में दुग्ध
पिने को है इंसानियत का पानी मिलता नहीं अब

एै रात आ सकूँ की नींद रख सिहराने पर मेरे ,
तुझे दुआएं दूँ हर पल के लिए जब जागूं सबेरे

Comment on this post

monika 09/08/2015 14:19

काव्य के क्षेत्र में आपकी पकड़ उच्च स्तरीय Sharhade Intazar Ved ji

ved 09/08/2015 17:20

shukriya Monika ji protsahan ke liye

anil juneja 09/07/2015 07:53

बहुत हीं उम्दा रचना ।