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06 Sep

कोई जानता यूँ है........ मुझे

Published by Sharhade Intazar Ved

कोई जानता यूँ है........ मुझे

मैं कतरा लिखता हूँ वो समंदर मानता है ,
ज़िन्दगी शायद वो मुझसे बेहतर जानता है,

पिने को पीता हूँ अश्क बेतकल्लुफ होकर जब,
वो मेरी हंसी को भी ग़मों का घर मानता है,

चाहत की बातें वो करता रहता है अक्सर,
मैं टूटता नहीं हूँ ये वो बेहतर जानता है,

मेरे वज़ूद में जो जीता है अंदर का रहबर,
वो तेरे भीतर की हर गली हर दर जानता है

Comment on this post

monika 09/08/2015 14:18

लाजवाब !!! मंत्रमुग्ध कर दिया

ved 09/08/2015 17:22

shukriya Monika ji

anil juneja 09/07/2015 08:00

वाह .........आप बहुत खूब लिखते है

ved 09/08/2015 17:22

shukriya Anil Bhai