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31 Aug

आज की धड़कनें .......(VII)

Published by Sharhade Intazar Ved

आज की धड़कनें .......(VII)

ना छेड़ इंसा तू इन नादान जीवों को,
नहीं तू जानता इनके जख्मो और नीवों को,
अगर तू प्यार देता इन्हे जाएगा,
शेर भी तेरे आगोश में मुस्कराएंगा,
और अगर तूने इनकी बेबसी पर है सितम ढाया,
चींटी हो या वानर काफी है तुझे गिराने को

तस्वीरें जहन की दास्ताँ बदल ना पाएंगी,
लिखी होगी तुमने इबारत वो ही तो नजर आएँगी,
चेहरा नूर हो भी जाए तो बेमानी है,
जबान खुलते ही सीरतें पहचान ली जाएँगी,

कहानियां कब ख़त्म हुई है चाहतों की,
यादों में बदल जाया करती हैं ,
कुछ से गुजरते हैं वो,
कुछ हमसे गुजर जाया करती हैं

ख्यालों में भी गर पर्दा किया जाये,
अंधेरों से कह दो उजालों से डरा जाए,

सोचता हूँ ये दुर्गाएँ काली ना हो जाएँ,
इससे पहले बंदा क्यूँ ना सवाली ही हो जाए,

एै रात देख आसमा मेरी नींदें है ले आया,
मुझे रख आगोश में अपने चाँद भी है मुस्कराया

Comment on this post

monika 09/01/2015 18:28

Bahut khoob .sabhi jeevo ke prti dyaa -bhav hona bahut achhi baat hai.bahut achha sandesh milta hai aap ki is rachna .desh,desh ke log , desh ka dhawj, sainik jeev sb ke prti aap ka pyaar aap ki chinta srahniy hai

ved 09/01/2015 18:43

Shukriya Monika ji