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30 Aug

आज की धड़कने .... (VI)

Published by Sharhade Intazar Ved

आज की धड़कने .... (VI)

दौलत की मोहब्बत तेरी मोहब्बत से बढ़कर पायी हमने,
इसके फेर में दुनिया की कई शै अपनों से पायी है परायी हमने,
जो सोच कर निकला तो था धन को पालूं प्रेम के लिए,
एक मोड़ पर जाकर देखा तो पाया प्रीत लफ्ज़ को हरजाई हमने,

सुबह ने याद किया हमें मुस्कराते हुए,
हमने याद किया दोस्तों को दुआएं सजाते हुए

नींदों में आपके दीदार की हसरत रखते थे हम,
तभी गुनगुना कर भी आपको जगाया ना गया

तेरी चाहतों की जब सादगी देखि हमने,
खुदा के बाद तुझे ही सजदे किये हमने,

मोहब्बत खेल होगी तेरे लिए हमारे लिए तो ज़िन्दगी है,
तूने खेला होगा जीत के लिए हमारी तो हार भी बंदगी है

श्री अशोक चक्रधर जी (काव्य सरिता के शिरोमणि सरताज )द्वारा

अभिनीत "छोटी सी आशा " सीरियल पर प्रतिक्रिया

वीरगति पाये पुत्र के पिता की वेदना को जीवंत किया जब आपने,
तिरंगे से भारत माता तक सुनाई दे गयी होगी पीड़ा विलाप ने,
ना बहेंगे अश्रु ये वादा जब कोई करता है खुद से वतन को जोड़ कर,
इंसानियत से जुड़ जाते हैं उसके नाते धारा का आँचल ओढ़ कर

अधूरी तमन्नाओं और ख्वाहिशों को पूरा करने का सफर,
एक उम्र के बाद शुरू होती है जीवन की दूजी डगर,
कुछ पर रहती है नज़र कुछ मंज़िल होती हैं निशाने पर,
दिल कहता मिलता है तू ना रुक तू हर तूफ़ाँ से गुजर

एै रात ले जा मेरा दर्द दे आ आसमान के पार,
बीत जाए तेरे साथ बिताया वक़्त इंतज़ार के पार,
सुबह जगाये तेरे आगोश मैं सकूँ के नज़राने के पार

Comment on this post

manju 08/31/2015 12:25

छोटी सी आशा " dil ko chhoo lene waala maarmik serial...aankho me aansu aagye ise dekh kr

ved 08/31/2015 19:16

jee hai Ashok jee kaa abhinay jeevant kar deta hai kirdar ko Thanks Manju ji

0m prakash 08/31/2015 03:48

लेकिन गुस्ताखी माफ़. एक बात समझ नही आई कृपया उसे समझाने की कृपा करें। आप ने कहा -----
तेरी चाहतों की जब सादगी देखि हमने,
खुदा के बाद तुझे ही सजदे किये हमने,

मोहब्बत खेल होगी तेरे लिए हमारे लिए तो ज़िन्दगी है,
तूने खेला होगा जीत के लिए हमारी तो हार भी बंदगी है

एक पल तो प्रियतमा को ख़ुदा के बाद अपने दिल में जगह दे दी उसे सजदे किये और दूसरे ही पल उस से रुस्वाई।
ये आखिर की पंक्तिआ पढ़ कर मन दुखी हो गया।
कितना अच्छा होता की अंत तक सब सुखद ही रहता

ved 08/31/2015 19:25

sukhad ant to har insan ki khawahish rahi hai Om ji lekin aaj ke dour men dono hi pahlu hain, Dukhi naa hon aapke jeewan ke pahloo sukhd hi honge ye duaa hai es deewane ki

0m prakash 08/31/2015 03:40

तेरी चाहतों की जब सादगी देखि हमने,
खुदा के बाद तुझे ही सजदे किये हमने,t..
अपने प्रीतम के प्रति अपने अथाह प्रेम को बहुत अच्छे से अभिव्यक्त किया लेकिन साथ -साथ ख़ुदा को भी याद रखा जो की बहुत ही जरूरी भी है

ved 08/31/2015 19:26

Sukriya Bhai

0m prakash 08/31/2015 03:39

तेरी चाहतों की जब सादगी देखि हमने,
खुदा के बाद तुझे ही सजदे किये हमने,
खूबसूरत पलों का अहसास

ved 08/31/2015 19:26

sukriya dost

0m prakash 08/31/2015 03:38

नमस्कार Sharhade Intazar Ved ji बहुत सुन्दर रचना प्रस्तुत की आप ने। पढ़ कर दिल खुश हो गया।
सुबह ने याद किया हमें मुस्कराते हुए,
हमने याद किया दोस्तों को दुआएं सजाते हुए

सुन्दर पंक्तिया


वाह,बेहद उम्दा अभिव्यक्ति......

ved 08/31/2015 19:27

shukriya bhai