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29 Aug

आज की धड़कने.......... (V)

Published by Sharhade Intazar Ved

आज की धड़कने.......... (V)

सूरज के उजालों की चलो इबादत कर लें,
चंद खुशियों और दुआओं से झोलियाँ भर लें,
वो किरणों की सौगाते, वो बूंदों की बरसातें,
चलों कुछ ज़मी से आसमा की हम बाते कर लें,

गुलों की महक सा हो जाए अंदाज़ आपका,
जिस तरफ से गुजरें महक जाए ख्वाब आपका

शोहरत के आसमा पर छा कर खुद को याद दिला रहे हो,
ये सितम क्यों सह रहे हो और क्यों किये जा रहे हो,
माना के आपको हमेशा याद करते है हम,
फिर हमें याद क्यों नहीं करते खाम्खा तन्हाई गुनगुना रहे हो

हमारी याद आप तक पहुँचती नहीं है,
जाने कैसी हमारी दुआओं में कमी है


उनका बसर इस दिल में होने को है तो सही,
मुलाकात का जिक्र होने को है तो सही,
ख़ुशी बन कर गुजरे हैं दिल के कूचे से,
दर्द बन कर अब है बसर अब है तो सही

रात मुलाकात में बीते या जुदाई में,
खुश्बुएं बिखरती तो हैं प्रीत की परछाई में,
आ नींद मुझे आगोश में ले ले अब तो,
ख्वाबो को महफ़िलें तो दूँ उनकी तन्हाई में

Comment on this post

manju 08/31/2015 12:30

zabardast !

ved 08/31/2015 19:34

shukriya Manju ji

anil juneja 08/30/2015 08:12

waah kyaa baat hai...!
Sharhade Intazar Ved ji chha gye aap to

ved 08/30/2015 11:12

shukriya Anil ji