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29 Aug

हुस्न .......रवायत

Published by Sharhade Intazar Ved

हुस्न .......रवायत

क्यों न खुद पर कुछ करम किया जाये,
खुद को संवार कर नज़रबंद किया जाये

चंद महकते गुलों से एै दोस्त,
खुशबुओं को फिर से हुनर मंद किया जाए,

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manju 09/07/2015 10:23

waah kyaa baat hai ...laajwaab