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26 Aug

दर्द की डगर.....ऐसी भी

Published by Sharhade Intazar Ved

दर्द की डगर.....ऐसी  भी

अब याद नहीं रखता के गम क्यूँ है,
ज़िन्दगी हवाले कर दी करम यूँ है.

तभी तो गम से भी याराने हो गए,
वो जो गम देने आये खुद ठिकाने हो गए,

एक ठंडक सी आँखों में उभर जाती है,
साँस अब इत्मीनान से आती है जाती है,

शिकवों से भी तौबा हो चली अब तो,
उनकी तड़प पर हमारी मुस्कराहट यूँ है

Comment on this post

anil juneja 08/30/2015 08:21

bahut khoob

मैं जल रहा हूँ ,आग बुझाने वाला न मिला
इन आँखों में अश्क हैं ,वो हंसाने वाला न मिला
ज़मीं बारिश की आस में है ,
सफर में है आषाढ़ का महीना
पर दिल -ए- ज़मी पर वो बादल बरसाने वाला ना मिला

ved 08/30/2015 11:15

sukriya Bhai