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23 Aug

पंजाब का दर्द............ विदेशों से

Published by Sharhade Intazar Ved

पंजाब का दर्द............ विदेशों से

पंजाब मेरे देश का वो परिवेश,
जिससे शोभित था हर मन विशेष,

गुरुओं की वाणियां और कौल सरदारो के,
खाता था कसमें वक़्त भी वफादारों से,

फिर आज एक दौर सा है चल पड़ा,
हर दूसरा था पंजाब छोड़ विदेश निकल पड़ा,

वो भी था गवारा के चलो कमाना था घर के लिए,
कमाया भी वतन आया भी ब्याह भी रचाया भी,
फिर छोड़ गया ब्याहता को वादे कर गया आने के,
साथ अपने ले जाने के,

वो दिल में अरमान लिए, आंसू आहों का तूफान लिए,
देखती रही रस्ता जाने कितने थे इम्तिहान दिए,

जाने क्या गुजरी उस बेटी के माता पिता पर,
खुशियां डालनी चाही जिन्होने, इंतज़ार और दर्द ही डाल पाये मगर,

अश्क भी सुख गए अब तो उम्मीद भी जाने को है,
वाहेगुरु तेरे पंजाब की धरा भी डगमगाने को है,

ये फरेब ये धोखे पंजाब के वीरों देखो छोड़ दो,
एक को ही दिल में बसाओ बाकियों से मुख मोड़ लो,

वो जिन्हे छोड़ आये हो तुम अपने देश में,
साथ कर लो अपने दुआ पाओगे हर एक वेश में,

पंजाब की धरा देती हैं गुरुओं के लहू का वास्ता,
फरेब धोखा ना करना देखो सत्य का है ये रास्ता,

दर्द देना तो है सरदारों ने कभी सीखा नहीं,
जो मीट जाता है औरों की खुसी के लिए ,
वो सिक्ख है क्या तुमने देखा नहीं,

अपने हाथों से गर्दनें उतार देते थे,
वो तुम्हारे पूर्वज थे अभिनेता नहीं,
शर्मिंदा ऐसे लहू को देखो कभी करते नहीं,
अपनों को गले लगाते हैं दूर तो करते नहीं

खालसा फ़तेह

Comment on this post

ekta 08/25/2015 10:17

सर्वोत्तम रचना

ved 08/25/2015 21:24

thanku ekta ji

om prakash 08/25/2015 03:45

pta nhi kyu
यह चादर सुख की मौला क्यू, सदा छोटी बनाता है
सिरा कोई भी थामो, दूसरा खुद छूट जाता है।
बेहतरीन अलफाज़, बहूत खूब ,उम्दा ,बहुत लाजवाब ,वाह....अद्भुत
Sharhade Intazar Ved ji aap ki rachnaao ki taarif ke liye mere shabd khjatm ho jaate hai ya chhote pdne lgte hai ...mujhe lgta hai ab mujhe apni shabdawali or bdani pde gi ,kyu ki aap ki rachna ke baare me kuchh keh kr mujhe bhi tasali nhi hoti ...lgta hai abhi bahut kuchh or bhi kehna chahiye

ved 08/25/2015 21:23

Jee om bhai shukriya aapke tarif kaa andaz hi to hai jo hamen likhne ko protsahit karta hai thank u very much ji

jaspreet 08/24/2015 18:12

waahe guru ji di meher tuwaade se sda bni rahe

ved 08/24/2015 19:29

Dhanbad Jaspreet jee, Koi nu padh ke dard vich rahat mili jave to sadaa likhna safal hai ji, Waheguru ji di sab logan par mehar rahe ji

jaspreet 08/24/2015 18:11

sat shri akal Sharhade Intazar Ved ji
samajh nhi aa rya ki kin shabda wich ais rachna di taarif kra ainu pd ke te mai te nishab ho gyi
kmaal kr dita tusy te ,dil nu chhoo gyi ,tareefe kaabil ,tusi te hu b hu haal byaan kita aye punjab da ..pd ke akha wich aansu aa gye ....bot - bot dhanwaad twaadaa ,...bs rukan da mn nhi krda .dil krda he bs baar -baar pd di jawa te baar -baar taarif krdi jawa ..kmaal .ae ,kmaal ae kmaal ae .