Overblog Follow this blog
Edit post Administration Create my blog
23 Aug

आज की धड़कने ...........(III)

Published by Sharhade Intazar Ved

आज की धड़कने ...........(III)

सुबह ने अंधियारे मिटा दिए है आज के,
सूरज ने दे दिए जीवन में उजाले विश्वाश के,
चलो बाँट लें ये पल पल दुआओं के एह्साश के,

जब हुआ एह्साश ये फकत आपके अल्फ़ाज़ है मोहब्बत नहीं,
दूरियों के दामन हमारे और भी थे करीब आ गए,
रूबरू तो होते रहे थे हम मगर,
फासले भी थे हौसला हमारे पा गए

जाने कबसे सहते हैं सबके नज़र अंदाज़ करने के सितम ,
अब बहते हैं बस अपनी रवानी लिए हम ,
ये शहर जब देखा तो हुआ है ये गुमाँ,
हर एक सिकंदर है यंहा शाम सुहानी लिए नम,

ख्वाब जो बसता है निगाहों में,
वो तो मुकम्मल हो भी जाए,
पर उस ख्वाब का क्या हो जो,
खुदा दिखाए मुकम्मल हो ना पाये

मैं खुद को बदल लूँ फिर तुम बदल जाना,
तब तक गुजरे पलों का वास्ता साथ निभा जाना,
तुम्हे जाना है और तुम जा कर ही मानोगे,
पर कभी सोचने लगो तो मत कहना के याद ना आना

रात एक बार फिर बुला रही है मुझे,
जाने किस ख्वाब के पहलु में ले जा रही है मुझे,
तुझे भी जा दोस्त सकूँ की नींद आ जाए,
ख्वाबों की परियां मेरे दर पे ला रही हैं तुझे

Comment on this post

anil juneja 08/30/2015 08:47

लाजवाब Sharhade Intazar Ved जी ....

उसी को देख कर जीतें हैं ,
कि जिस काफर पर दम निकले !....
ये दिल की बस्ती भी अजीब बस्ती है ,
लूटने वाले को ही तरसती है।

ved 08/30/2015 11:03

Shukriya Anil Bhai

ekta 08/25/2015 10:36

झिंझोड़ दिया...मन को
वाह ! क्या कहने------

ved 08/25/2015 21:27

Sukriya Ji ekta ji

ajay 08/24/2015 14:12

कभी तुझमें पलती है,
कभी मुझमें पलती है,
ख्वाइशें कभी बेघर नहीं होती..........

~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
जाने कबसे सहते हैं सबके नज़र अंदाज़ करने के सितम ,-------------
जब हुआ एह्साश ये फकत आपके अल्फ़ाज़ है मोहब्बत नहीं,---------------
तुम्हे जाना है और तुम जा कर ही मानोगे, पर कभी सोचने लगो तो मत कहना के याद ना आना

bahut sunder likha hai sir kmaal kr diya

ved 08/24/2015 17:00

Shkriya Ajay bhai