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21 Aug

वतन की कलम से .................

Published by Sharhade Intazar Ved

वतन की कलम से .................

जब वतन में पनपने वाली समस्याओं से जूझता हुआ आम इंसान निराश होने लगे, खुद को कमजोर और असहाय महसूश करे तो और कुछ बदलने की चिंगारी हो जो दब रही हो, तब ये पंक्तियाँ उम्मीद है हौसला बढ़ा सकें .............

तरकश रखता हूँ दुआओं के , उम्मीदों के तीर रखता हूँ,
धनुष रखता हूँ चाहतों का , मैं कलम सा पीर रखता हूँ,

काट दे माँ भारती की हर जंजीर वो शमशीर रखता हूँ,
बेड़ियां हों लाख मगर रक्श जारी रहे हौसला अधीर रखता हूँ,

कलम का सिपाही निराश कभी हो नहीं सकता,
आपके लफ़्ज़ों का असर यक़ीनन खो नही सकता,

चिंगारी दब रही है उसे हवा देता हूँ गुस्ताख़ मैं,
अंगारों सा बरसेंगे आसमाँ देखेगा, ऐसी ताबीर रखता हूँ,
तरकश रखता हूँ दुआओं के...................

जय हिन्द

Comment on this post

monika 08/25/2015 13:14

bahut khoob

ved 08/25/2015 21:36

Shukriya Monika ji

om prakash 08/22/2015 14:02

waah...sahi kaha aap ne कलम का सिपाही निराश कभी हो नहीं सकता,...or aap ki kalam me to bahut taakat hai josh hai or jaadu hai ye kamjor asahaaye or niraash logo me jaan fook de
behtreen gazal

ved 08/23/2015 16:48

shukriya Om BHai