Overblog Follow this blog
Edit post Administration Create my blog
21 Aug

छूटा बचपन......... या इंसान की फितरत

Published by Sharhade Intazar Ved

छूटा बचपन......... या इंसान की फितरत

ये भोलापन बचपन साथ क्यों ले जाता है,
इंसान तो बड़ा हो जाता है, बड़प्पन छूट क्यों जाता है,

कुछ हैं जिनके अल्फ़ाज़ अब भी निकलते होंगे दिल से,
बचपन की नादानियां याद करके वक़्त ठहर क्यों जाता है,

हर इंसान में खुदा का अंश होता जरूर है दोस्त,
किसी में नज़र आता है तो किसी में काफूर हो जाता है,

कोई तो ऐसा भी मिलता है इस जन्हा में यारों,
एक तरफ खींचता है बड़प्पन फिर भी वो बचपना निभाता है

Comment on this post

om prakashj 08/22/2015 13:50

slaam Sharhade Intazar Ved ji .waah waah waah
ek ek sher bahut khoob ,baar baar pdne ka mn krta hai or jitni baar bhi pd lo mn nhi bharta ,kyaa khoob likha hai
ये भोलापन बचपन साथ क्यों ले जाता है,
इंसान तो बड़ा हो जाता है, बड़प्पन छूट क्यों जाता है,..........bilukl sahi baat .
कुछ हैं जिनके अल्फ़ाज़ अब भी निकलते होंगे दिल से,
बचपन की नादानियां याद करके वक़्त ठहर क्यों जाता है, ...bahut khoob -aise dosto ki yaad aa gyi sach me jin ke alfaz ab bhi dil se niklte hai~~~~~ or vo bachapan ke din bhi kya din the na koyi chinta na koyi fikr.
हर इंसान में खुदा का अंश होता जरूर है दोस्त, किसी में नज़र आता है तो किसी में काफूर हो जाता है,~~~kabile taareef.
कोई तो ऐसा भी मिलता है इस जन्हा में यारों, एक तरफ खींचता है बड़प्पन फिर भी वो बचपना निभाता है.zabardast

ved 08/23/2015 16:45

Shukriya Om Bhai aapka , Bachpan me khudaai shamil rahti hai lekin alag alag umr tak thanks