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17 Aug

आज की धड़कने .............

Published by Sharhade Intazar Ved

आज की धड़कने .............

सूर्य की बादलों में अटखेलियां हैं हो रहीं,
इंसान के जीवन की फिर एक सुबह है हो रही,
भोर की किरणे दुआए दे रही हैं यूँ,
धरा भी जैसे हर छन पुलकित पुलकित हो रही,

संघर्ष की दिशा का चयन गर सही ना हो पाये,
तो फिर इंसान ता उम्र संघर्ष में ही बीती पाये,
कभी पता भी नहीं चलता वक़्त के बहाव में,
के हमने संघर्ष भी किया पल फ़िज़ूल भी गंवाए

ज़िन्दगी लिखते लिखते मन स्वार्थी भी हो जाता है,
सच को छुपाता है ख्वाब परोसता जाता है,
इंसान को भी हकीकत का रंग अब कहा भाता है ,
दो पल पढ़ कर ही चलो कुछ तो सकूँ आता है,
सोचता हूँ तभी शायद कवि कवि बन पाता है

अपनी हथेलियों पर गर उषा लिखना,
उजालों को बिखेरने का हौसला रखना

टूट कर बिखर गया होगा कोई,
फिर भी एह्साश सा रह गया होगा कोई

तूने जब खत लिखा होगा ज़िक्र मेरा ही रहा होगा,
किसी ने भी पढ़ा होगा हर लफ्ज़ मुझमे जी रहा होगा,

दिलों से चूड़ियों का मेल हो नहीं पाता,
चूड़ियों में अक्श जो नज़र नहीं आता,

ज़िन्दगी के ठिकानो के अब हम तलबगार ना रहे.
क्या खबर के मोहब्बत करने वालों से हमें प्यार ना रहे,

एै रात चल के अब तुझे विदा कर दें,
कुछ अँधेरा कर लें के नींद आ जाए जिस्म को,
फिर जब हरकत में जिस्म आ रहा होगा,
जाने वो सुबह का मंज़र क्या कह रहा होगा

Comment on this post

ajay kumar 08/22/2015 16:36

Bahut Hi Sundar Aur Dil Ke Sache Ahsason Ki Tarah....
May You Succeed In Everything Always... May You Stay Happy..Healthy..Wealthy And Blessed Always

ved 08/23/2015 17:00

Shukriya Ajay ji thanks

om prakash 08/20/2015 14:08

ज़िन्दगी लिखते लिखते मन स्वार्थी भी हो जाता है,
सच को छुपाता है ख्वाब परोसता जाता है,
इंसान को भी हकीकत का रंग अब कहा भाता है ,
दो पल पढ़ कर ही चलो कुछ तो सकूँ आता है,
सोचता हूँ तभी शायद कवि कवि बन पाता है.....bilkul sahi kaha ji .bahut sunder .taarif-e-kaabil

ved 08/20/2015 18:05

Shukriya Om Bhai

anil juneja 08/18/2015 17:11

बहुत हीं बेहतरीन अंदाज़े बयाँ।

ved 08/18/2015 19:09

Shukriya Anil Bhai