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13 Aug

बाल श्रमिकों ......से आरजू

Published by Sharhade Intazar Ved

बाल श्रमिकों ......से आरजू

कुछ वक़्त और बीते,
इनकी आखों में बेबसी ना मिले चिंगारियां हों,
गिरेबां हो हुक्मरानो के बन्दूको की क्यारियां हों,

अपने हक़ के लिए हो रही प्रतिशोध की तैयारियां हो,
ज़िन्दगी पे रश्क हो जाए वो ही बस कारगुजारियां हों

तमन्ना है के तुम्हारे बच्चो को गुलशन मिलें,
रौशन ज़िंदगानी हो महकते वक़्त की सवारियां हों

Comment on this post

Om prkash 09/13/2015 07:00

Slaam sharhade intazar ved ji
Bahoot khoob .waah kyaa kehne jnaab

ved 09/16/2015 20:53

शुक्रिया मित्र

ekta 08/16/2015 02:41

waah bhut khoob

ved 09/16/2015 20:55

शुक्रिया मित्र

manju 08/15/2015 14:19

मानव जगत में उत्साह, उमंगों एवं सपनों का सर्वोकृष्ट जीवित पुंज 'बालक' को माना गया है | बच्चे किसी भी राष्ट्र के भविष्य का प्रतिनिधित्व करते हैं | वे देश के भावी कर्णधार एवं प्रगति का आइना हैं | उनका चमकता या मुरझाया हुआ चेहरा इस बात का प्रतीक है की वह देश कितना खुशहाल , संपन्न या विपन्न है | ये राष्ट्र की धरोहर होते हैं जिनकी समुचित देखभाल एवं विकास पर ही किसी भी राष्ट्र की प्रगति निर्भर करती है | वे सभ्यता एवं भविष्य के आधार हैं और निरंतर पुनजीर्वन का स्त्रोत भी, इन्ही के कन्धों पर मानवता के उज्जवल भविष्य की आधार-शिला रखी जा सकती है,किन्तु विडम्बना इस बात की हे कि इन बच्चों कि एक बड़ी संख्या ऐसे बच्चों कि है, जिनका जीवन संघर्षों एवं असामान्य परिस्थिति में बीतता है | प्रश्न ये है कि जिन बच्चों का बचपन ही समस्याओं से घिरा हुआ है, उन बच्चों का भविष्य क्या होगा? क्या ये बच्चे बड़े होकर पढेंगे या बाल श्रमिक बनेंगे और वे समाज और राष्ट्र के निर्माण में अपना योगदान किस प्रकार से दे सकेंगे ? bahut badia likha aap ne ved ji --इनकी आखों में बेबसी ना मिले चिंगारियां हों,
गिरेबां हो हुक्मरानो के बन्दूको की क्यारियां हों,

अपने हक़ के लिए हो रही प्रतिशोध की तैयारियां हो,
ज़िन्दगी पे रश्क हो जाए वो ही बस कारगुजारियां हों....waah

ved 09/16/2015 20:56

शुक्रिया मित्र

mudit mishra 08/14/2015 03:30

Shukria .god bless u

ved 08/14/2015 17:51

Thanks Mudit ji