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12 Aug

अकेलापन (एक दोस्त की ख्वाहिश पर)

Published by Sharhade Intazar Ved

अकेलापन (एक दोस्त की ख्वाहिश पर)

ये दुनिया का जो मेला है,
यंहा हर एक मिलता अकेला है,
कहने को तो महफ़िल भी है,
महफ़िल में तन्हा एक दिल भी है,
मिलता नहीं अब वो जो इस दिल से खेला है,
जिसने लगा रखे हैं नकाबों पे नकाब,
वो असली चेहरा भूल चूका ये भी एक झमेला है,
सोचता है के कारवां है साथ,
पर खुद में तो बड़ा अकेला है,
ये दुनिया का जो मेला है

Comment on this post

ajay kumar 08/23/2015 17:12

bewafa h dunia kisi ka aitbaar na karo,
har pal dete h dhoka kisi se pyar na karo,
mit jao beshaq tanha ji kar,
par kisi k sath ka intzaar na karo.

ved 08/23/2015 18:41

khoob Ajay ji

om prkash tiwari 08/16/2015 15:09

हम पर दुःख का पर्वत टूटा ,
तब हमने दो चार कहे।
उसपे भला क्या बीती होगी ,
जिसने शेर हज़ार कहे !
हमे जरा वनवास मिला ,
गर कुछ दिन तो क्या ,
उसकी सोचो जो जंगल
को ही अपना घरबार कहे !
शेर वही है शेर जो शायर लिखे खून या आंसू से ,
बाकि तो सब अल्लम - गल्लम ,
फ़िज़ूल कहें, बेकार कहें !
jaadu hai Sharhade Intazar Ved ji aap ki shayari me ,aap ki kalam me aap ki soch me or aap me.waah

ved 08/23/2015 18:42

Sundar om Bhai shukriya

vikas lamba 08/13/2015 16:33

Bahut khoob

ved 08/23/2015 18:42

Shukriya Vikas ji

vikas lamba 08/13/2015 16:33

Bahut khoob

anil juneja 08/12/2015 17:32

bahut umda .

Zindgi Ki Raho Mai Kabhi Akelapan Na Mile

Zindagi Mai Tumhe Kabhi Gum Na Mile

Dua Karte Hai Hum us Khuda Se

Tuhme Jo Bhi Dost Mile khud Se Kam Na Mile

ved 08/12/2015 18:55

suppper Anil ji thanks