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10 Aug

तिरंगा गरीब हाथों में

Published by Sharhade Intazar Ved

तिरंगा गरीब हाथों में

आज़ाद तिरंगा कब होगा,
गरीब ना बच्चा जब होगा
भारत का कोई गरीब बच्चा जब तिरंगा बेचता है,
भारत की रज रज का साथी आवाम उसको देखता है,
जाने कितनों ने वो जब आया कार के शीशे चढ़ाये,
फिर भी वो मुस्कराकर उम्मीदों के सलाम ठोकता है,
वजह क्या थी दो निवाले, तन ढकने को दो जोड़ी कपडे,
मगर ये वो अपनी बेबसी आँखों से कभी ना बोलता है
टनो सड़ जाता है आनाज, होली कपड़ों की भी जलती,
लेकिन देश के हुक्मरानो की आँखे कभी भी ना खुलती,
जाने कब का क़र्ज़ तिरंगे का, जो तुम्हारे आगे पीछे डोलता है,
इन बच्चों का ख्याल रख लो, तिरंगा देश से बोलता है,

जय हिन्द

Comment on this post

ajay kumar 08/22/2015 16:43

अद्भुत लेखन है।

ved 08/23/2015 17:05

Shukriya Ajay Bhai

monika 08/17/2015 10:42

bahut sunder Sharhade Intazar Ved ji lekin
अजीब मिठास है गरीबो के खून में भी,
...जिसे भी मौका मिलता है वो पीता जरुर है..

ved 08/17/2015 20:39

shukriya Monica ji aur Jeesne bhi ye lahoo piya hai uska lahoo yahi garib ek din gatar ki tarah bahayega aur ye waqt jarur aur jarur aayega

anil juneja 08/16/2015 03:14

जिसके पेट खाली है वो झंडा बेच रहे हैं, और जिसके पेट भरे है वो देश बेच रहे हैं। sach ko saamne rakhte huyi maarmik rachna

ved 08/23/2015 17:08

shukriya Anil Bhai

ekta 08/16/2015 02:58

ज़माने भर में मिलते हे आशिक कई ,
मगर वतन से खूबसूरत कोई सनम नहीं होता ,
नोटों में भी लिपट कर, सोने में सिमटकर मरे है कई ,
मगर तिरंगे से खूबसूरत कोई कफ़न नहीं होता....
जय हिन्द ..जय भारत..
gazab likhte hai aap ...mai to aap ki shayri ki kaayal ho gyi.

ved 08/23/2015 17:07

Jabarjast likha aapne Bhi Ekta ji Shandar , SHukriya ji

anil juneja 08/11/2015 14:29

ab to mzhb koyi aisa bhi laya jaaye,
jis se insaan ko insaan bnaya jaaye .
aadmi or aadmi ke beech ho aise rishte,
mai rahu bhukha ,to tujh se bhi na khaaya jaaye ~~~~~~
bahut khoob likha aap ne Sharhade Intazar Ved ji

ved 08/11/2015 17:59

Sundar Anil ji Khoob