Overblog Follow this blog
Edit post Administration Create my blog
06 Aug

मोहब्बत के रंग जुदा जुदा

Published by Sharhade Intazar Ved

मोहब्बत के रंग जुदा जुदा

हुस्न उलझन है ये जानते सब हैं,
मुहब्बत में लुटे बिना मानते कब हैं,
चाहे जितना पूछ लो हुस्न वालों से,
वो अपनी अदाएं सम्हालते क
ब हैं

बिना ेऐतबार के वादे भी किये जाते हैं,
कुछ वो निभाते हैं कुछ हम निभाते है

मोहब्बत के बंधन की दास्ताँ निराली ही मिलेगी,
यादें कैसी भी हों बैसाखी या दीवाली ही मिलेगी,
मिलने की आस ना भी हो तब भी,
जब तक जियेंगे उनकी यांदें सम्हाली ही मि
लेंगी

मोहब्बत रास आ जाये ये तो मुमकिन नहीं,
ज़माने को देखा है हमने ज़माने ने हमें देखा नही

Comment on this post

anil juneja 08/27/2015 18:22

मोहब्बत के बंधन की दास्ताँ निराली ही मिलेगी,
यादें कैसी भी हों बैसाखी या दीवाली ही मिलेगी,
मिलने की आस ना भी हो तब भी,
जब तक जियेंगे उनकी यांदें सम्हाली ही मिलेंगी

waah kya baat hai !

ajay kumar 08/23/2015 16:47

बेहद उम्दा

monika 08/09/2015 15:15

Mohabbat cheez hi aisi hai
Kabhi hoti hai apno se
Kabhi hoti hai sapnon se
kabhi anjaan raahon se
kabhi gumnaam naamon se

Mohabbat cheez hi aisi hai
kabhi hoti hai phoolon se
kabhi bachpan ke jhoolon se
Mohabbat cheez hi aisi hai
Dukhon mai roll deti hai
Dard Anmol Deti hai
Mohabbat cheez hi aisi hai ...

ved 08/09/2015 15:54

khubsurat jajba aapka Monika ji supppper