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06 Aug

हिन्द सरताज कलाम साहेब और उनके ख़ानदान के नाम

Published by Sharhade Intazar Ved

हिन्द सरताज कलाम साहेब और उनके ख़ानदान के नाम

सज़दे में सर खुद ब खुद झुक जाता है,
जब इंसान इंसानियत निभाता जाता है
इंसानियत से हर दिल का गहरा नाता है,
मजहब दीवार नहीं होता कंही
ये तो दिलों को जोड़ने का पुराना साँचा है,
वो जो फकीरी में गुजर करने पे हैं आमादा,
फरिश्तों के ओहदों से उन्हें ही नवाज
ा जाता है

Comment on this post

ajay kumar 08/23/2015 16:46

वाह आप बहुत खूब लिखते है

ekta 08/16/2015 03:08

bahut sunder
चल दिया आकाश मे वो बन के एक तारा,
पृथ्वी सुनी हुई जग सुना हुआ हमारा, -