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06 Aug

मोहब्बत खेल नसीबों का

Published by Sharhade Intazar Ved

मोहब्बत खेल  नसीबों का

शोहरतें आपकी खिदमत में बसर हैं ,
चाहतो का कौन जाने कितना असर है,
दूर तो हो पर करीब रहना,
मोहब्बत में हमारा नसीब रहना,
ये इल्तज़ा हमारी समझ कर,
हर दम खुदा सा तुम
करीब रहना

सफर इश्क का दर्द से शुरू करता हूँ,
वो जो लूटते हैं सकूँ उन पर गुरुं करता हू
ँ,

इश्क में जो जीने का बहाना ढूंढता रहा,
दर्द उसका हमेशा ही ठिकाना ढूंढता रहा,
ना मिला इश्क ही जाने क्या सबब होगा,
मोहब्बत को दीवानगी में दीवाना ढूंढ
ता रहा

Comment on this post

anil juneja 08/27/2015 18:24

सफर इश्क का दर्द से शुरू करता हूँ, वो जो लूटते हैं सकूँ उन पर गुरुं करता हूँ,
lajwaab ,

anil juneja 08/27/2015 18:24

दूर तो हो पर करीब रहना, मोहब्बत में हमारा नसीब रहना,
ये इल्तज़ा हमारी समझ कर, हर दम खुदा सा तुम करीब रहना
bahut khoob

ajay kumar 08/23/2015 16:45

बेहतरीन अलफाज़, बहूत खूब ।

monika 08/09/2015 15:29

behtreen

ved 08/09/2015 15:58

Shukriya Monika ji