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03 Aug

स्याही के अंदाज़,

Published by Sharhade Intazar Ved

जाने कितने लफ़्ज़ों के मानो को अंजाम दे डाले, बिन लिफाफों के ही दिलों के पैगाम दे डाले,

जाने कितने लफ़्ज़ों के मानो को अंजाम दे डाले, बिन लिफाफों के ही दिलों के पैगाम दे डाले,

जाने कितने लफ़्ज़ों के मानो को अंजाम दे डाले,
बिन लिफाफों के ही दिलों के पैगाम दे डाले,
स्याही की दरकार होती है जज्बात लिखने को
आपकी स्याही से जाने कितनो ने नाम बदल डाले
अश्को की स्याही से जब लफ्ज़ लिखे होंगे,
दर्द के पन्नों पर तड़प के थे दाम बदल डाले,
फिर जब कुछ लफ्ज़ तन्हाई के नाम किये होंगे,
महफ़िलों के गीत तुमने थे सर
े आम बदल डाले

Comment on this post

manju 08/17/2015 10:31

Behatrin andaaz e bayan.

ved 08/17/2015 20:40

Thanks Manju ji

om prkash tiwari 08/12/2015 19:58

bahut khoob