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03 Aug

कण और बूँद

Published by Sharhade Intazar Ved

धरा का जो कण एक बूँद का प्यासा है, वो कण मिटटी का दिया हुआ दिलासा है

धरा का जो कण एक बूँद का प्यासा है, वो कण मिटटी का दिया हुआ दिलासा है

धरा का जो कण एक बूँद का प्यासा है,
वो कण मिटटी का दिया हुआ दिलासा है
पत्तों पर ठहरी हुई बूंदों का इंतज़ार,
जाने किस कण की प्यास बुझाता है,
प्रतीक्षा में बूँद भी है और कण भी है,
धरा पर पूरी हो या गगन में,
ये तो बूँद और कण की
अभिलाषा है

Comment on this post

manju 11/22/2015 11:20

lajwaab

anil juneja 08/27/2015 18:28

very nice

ajay kumar 08/22/2015 16:55

साहब आप कमाल है हर शेर खुद ब खुद बोल उठता है कमाल की संजीदगी है आपकी गज़लों में

ved 08/23/2015 18:34

Shukriya Ajay Bhai

ajay kumar 08/22/2015 16:54

साहब आप कमाल है हर शेर खुद ब खुद बोल उठता है कमाल की संजीदगी है आपकी गज़लों में