Overblog Follow this blog
Edit post Administration Create my blog
03 Aug

खुद को समेटने का वक़्त,

Published by Sharhade Intazar Ved

टूट कर बिखरने से पहले खुद को जोड़ लिया है, इस ज़िन्दगी ने बिन तेरे बेहतर मोड़ लिया है,

टूट कर बिखरने से पहले खुद को जोड़ लिया है, इस ज़िन्दगी ने बिन तेरे बेहतर मोड़ लिया है,

टूट कर बिखरने से पहले खुद को जोड़ लिया है,
इस ज़िन्दगी ने बिन तेरे बेहतर मोड़ लिया है,
कसर नहीं रखी तूने उजाड़ने में उम्मीदें ,
तभी तुझसे रिश्ता कुछ हद तक तोड़ ल
िया है

Comment on this post

anil juneja 08/27/2015 18:30

gazab ka likha hai Sharhade Intazar Ved ji

ajay kumar 08/22/2015 16:49

laajwaab
Kaafi karib Ruh ke

ved 08/23/2015 18:30

Shukriya Ajay Bhai