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02 Aug

खामोशियों के लफ्ज़

Published by Sharhade Intazar Ved

खामोशियों के लफ़्ज़ों को पढ़ने को कह रहे हो, हमारी तन्हाइयों में जाने कब से रह रहे हो,

खामोशियों के लफ़्ज़ों को पढ़ने को कह रहे हो, हमारी तन्हाइयों में जाने कब से रह रहे हो,

खामोशियों के लफ़्ज़ों को पढ़ने को कह रहे हो,
हमारी तन्हाइयों में जाने कब से रह रहे हो,
ये बात जुदा है मेरे अफ़साने से,
जाने क्या लिख रहे हो, जाने क्या कह रहे हो

 
Comment on this post

anil juneja 08/27/2015 18:33

ati sunder

mukesh soni 08/22/2015 14:31

gazab .kya khoob byaa kiya hai "हमारी तन्हाइयों में जाने कब से रह रहे हो,"
~~~~~~~~

"खामोशी कुछ बोल रही है भेद अनोखे खोल रही है, कोई भी इसका राज़ ना जाने एक हकीकत लाख फ़साने"

ved 08/23/2015 16:54

Khoob Mukesh bhai SHukriya

monika 08/17/2015 10:34

bahut sunder .....ise baar -baar bhi pdna achha lgta hai .bahut khoob

ved 08/23/2015 16:54

SHukriya Monika ji thanks

manju sachdeva 08/04/2015 13:48

waah kya baat hai

ved 08/23/2015 16:54

thanks Manju ji