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02 Aug

रिश्तों की महक

Published by vishnu sharma

चलो रिश्तों में नयापन अंजाम देते  हैं, कुछ गीले तुम करो कुछ खता हम मान लेते हैं

चलो रिश्तों में नयापन अंजाम देते हैं, कुछ गीले तुम करो कुछ खता हम मान लेते हैं

चलो रिश्तों में नयापन अंजाम देते हैं,
कुछ गीले तुम करो कुछ खता हम मान लेते हैं
आज तेरे मुस्कराने पर चल हम क़त्ल हो जाएँ,
कल तेरी हसी को हम दिल्लगी मान लेते हैं,
तूने पूछा गर हाल हमारा किसी मोड़ पर,
उस मोड़ को हम अपनी दीवानगी मान लेते हैं,
कहते हैं महक जाता है तुझसे जो मिलता है,
तुझे हम बहारों का फरिश्ता ही म
ान लेते हैं

Comment on this post

manju 11/22/2015 11:19

waah bahut sunder

ajay kumar 08/22/2015 16:53

जज़्बातों को गझल का रुप देने की आपकी कला वाकई में अप्रतिम हैं ज़नाब ,बहुत हीं उम्दा रचना ।

ved 08/23/2015 18:32

shukriya Ajay Bhai

monika 08/17/2015 10:36

Behad umda

कहते हैं महक जाता है तुझसे जो मिलता है,
तुझे हम बहारों का फरिश्ता ही मान लेते हैं..
very nice

ved 08/23/2015 18:32

Shukriya Monika ji